सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। इसविषय पर कई वर्षों से दुनियाभर में बहस हो रही है। मेसोपोटामिया सहित कई प्राचीन सभ्याताओं ने इसे सदियों पहले ही मान्यता दे दी थी। लेकिन 17वीं और 18वीं सदी में लगभग सभी देशों में इसे पाप माना जाता था। लेकिन इतिहास गवाह है कि भारत में 1861 में ही इसे कानूनी तौर पर मान्यता मिल गई थी तब जब ब्रिटिश साम्राज्य के 42 पूर्व उपनिवेशों में धारा 377 मौजूद है।
गुरुवार का दिन भारत में रह रहे समलैंगिकों के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीस दीपक मिश्रा अपना फैसला सुनाना शुरू किया तब उन्होंने कई विचारकों, लेखकों और नाटककारों के विचार और कथनों से इसकी शुरुआत की। उसी समय उन्होंने शेक्सपीयर के सबसे प्रसिद्ध कथन 'नाम में क्या रखा है' से शुरुआत की और कहा कि गुलाब को किसी भी नाम से पुकारें उससे मिठाई की खुशबू नहीं आएगी। जिंदगी में सिर्फ पहचान महत्वपूर्ण है। वह पहचान ही है जिससे गौरवपूर्ण जीवन की आजादी मिलती है।
इन सबके बीच हम बात कर रहे हैं किन किन देशों में समलैंगिकता है कानूनी और कहां आज भी है गैर कानूनी
इन देशों में समलैंगिक संबंधों पर मिलती है मौत की सजा
सारे पश्चिमी देश खुले विचारों वालें नहीं है। दुनिया में कई ऐसे राष्ट्र हैं जहां समलैंगिकों को संबंध बनाने पर मौत की सजा सुनाई जाती है। लेकिन इतिहास के कई दस्तावेजों में 'गे' जोड़ों का वर्णन मिलता है। रोमन शासक हाद्रियान और उनके प्रेमी एंटियोंस के संबंधों को दिखाती हुई 11 हजार साल पुरानी कलाकृति मौजूद है, जो बताती है कि उस दौरान कैसे रिश्तों को मान्यता प्राप्त थी।
यही नहीं पुनर्जागरण काल में कई ऐसे विचारक और नेता मौजूद थे जो खुद को 'गे' कहते थे। यूनान के देवताओं, रिहोरेस और सेठ को 'गे' कहा जाता था।
अपने अधिकारों के लिए दुनियाभर के समलैंगिकों ने लंबी लड़ाई लड़ी है। समलैंगिकों को सबसे पहले मान्यता 2000 में नीदरलैंड में मिली थी और इसके साथ ही समलैंगिक शादी को मान्यता देने वाला पहला देश बना। अभी तक 26 देश दे इसे मान्यता दे चुके हैं। 27 देशों में अब शादी वैध है। 120 देश में समलैंगिकता अपराध नहीं।
समलैंगिकता 76 देशों में अभी भी अपराध की श्रेणी में है जबकि ईरान, सूडान, सऊदी, यमन, सोमालिया, इराक नाइजीरिया, सीरिया में मौत की सजा का प्रावधान है।