टीवी के लोकप्रिय रियलिटी शो 'बिग बॉस' के 14वें सीजन में प्रतियोगी बनकर गए शहजाद देओल घरवालों के नामांकन का शिकार होकर बाहर आ गए हैं। उन्हें इस बात का दुख है कि उनको घर वालों ने ही बाहर कर दिया। शहजाद का मानना है कि अगर उन्हें जनता के हवाले किया गया होता तो शायद वह अब भी घर में ही होते! इसी के साथ उन्होंने 'बिग बॉस' के निर्माताओं को भी एक काम की सलाह दे डाली। घर से बाहर निकलते ही अमर उजाला ने शहजाद देओल से घर में उनके अब तक के सफर के बारे में चर्चा की।
'बिग बॉस' के घर से बाहर हुए शहजाद देओल, गुस्से में शो के निर्माताओं को दे डाली ये सलाह
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शहजाद ने अमर उजाला को बताया कि उनकी बागडोर घरवालों के हाथ में थी। अगर जनता के हाथ में होती तो शायद वह बच जाते! शहजाद ने कहा, 'घरवालों से भी ज्यादा मुझे दिक्कत अपने सीनियर्स से हुई। घरवालों से मुझे बहुत कम वोट मिले थे लेकिन जब सीनियर्स की बारी आई तो वह सब मेरे विपक्ष में ही निकले। घरवालों की तरफ से तो मुझे सिर्फ दो ही वोट मिले। बाकी सबको चार चार थे। फिर बाकी बचे तीन सीनियर्स, तो उन्होंने सिर्फ मुझे ही बाहर जाने का रास्ता दिखाया। मुझे अच्छा लगता कि अगर मुझे जनता बाहर करती।'
शहजाद का कहना है कि बिग बॉस के जो भी नियम हैं, उनके खिलाफ आखिर कौन जा सकता है? अब तक जनता की तरफ से वोटिंग शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन हुई ही नहीं। उन्होंने कहा, 'शो के खिलाफ तो मैं कुछ नहीं कहना चाहता लेकिन मुझे उनके इस कदम से निराशा हुई है। मेरे सीनियर्स को मैं उसी हफ्ते में थोड़ा ठंडा लगा। जिन लोगों के मुकाबले में ठंडा था, वह लोग तो नामांकन में थे ही नहीं। अगर वह लोग नामांकन में आते और अगर आज भी जनता की तरफ से वोटिंग कराई जाए तो मुझे पक्का यकीन है कि मैं बाहर नहीं जाऊंगा।'
घर के अंदर शहजाद को गायब का ही टैग मिल गया था इस वजह से घर की काफी चीजों में वह अपना योगदान नहीं दे पाए। शहजाद का कहना है, 'जब मैं कुछ करूंगा ही नहीं तो जाहिर है कि ठंडा तो मैं दिखूंगा ही। बिग बॉस को जो बनाने वाले हैं, उनके हाथ में हर एक खिलाड़ी की बागडोर है। वह जो चाहते हैं, वही करते हैं। और वही सब कुछ कर सकते हैं। उनके खिलाफ न तो कोई जा सकता है और न ही कुछ बोल सकता है। लेकिन, मैं 'बिग बॉस' से इतना जरूर कहना चाहूंगा कि अगली बार से जो भी प्रतियोगी बाहर होता है तो वह सिर्फ जनता के मतों के आधार पर ही बाहर हो।'
बिग बॉस के इतिहास में पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि शुरुआत से ही सीनियर फ्रेशर्स के साथ में जुड़े हों। शहजाद का मानना है कि यह विचार जरूर नया है लेकिन इससे कहीं न कहीं कई लोग ऐसे हैं जिनका व्यक्तित्व अब तक सामने नहीं आ पाया है। उन्होंने कहा, 'फ्रेशर्स ने सीनियर्स को ही अपने पक्ष में करने की कोशिश की है जिससे कि वह नामांकन और घर से बाहर होने से बच सकें। इससे वह अपने अंदर के व्यक्तित्व को नहीं दिखा पाए। सीनियर्स से खिलाफ मैं कुछ कहना नहीं चाहता। बस एक सिद्धार्थ शुक्ला ही हैं जिन्होंने खुद भी शो में कहा कि वह निक्की तंबोली के थोड़ा पक्ष में रहे। इसके अलावा बाकी किसी में ऐसा कुछ दिखा नहीं।'