पिछली सदी के नौवें दशक में हिंदी सिनेमा ने दो चर्चित अभिनेत्रियों के बीच जबरदस्त मुकाबला देखा। ये अभिनेत्रियां थीं श्रीदेवी और जया प्रदा। दोनों की अदावत के बारे में खूब लिखा गया और खूब किस्से दोनों के मुकाबले के सुर्खियों में रहे। लेकिन, पहली बार अभिनेत्री जया प्रदा ने अपनी इस लाग डपट पर दुख जाहिर किया है और इस बात पर भी अफसोस जताया है कि साथ काम करते हुए दोनों के बीच कभी बात नहीं होती थी।
एक म्यूजिक रियलिटी शो में पहुंची जया प्रदा के सामने शो के प्रतिभागियों ने उनकी फिल्मों के तमाम गाने पेश किए। अपनी पहली हिंदी फिल्म ‘सरगम’ का गाना ‘ढपली वाले ढपली बजा..’ सुनकर जया काफी भावुक हो गईं और फिल्म में अपने साथी सितारे ऋषि कपूर की तमाम यादें उन्होंने इस दौरान साझा कीं। तेलुगू फिल्म ‘सिरि सिरि मुव्वा’ की ये हिंदी रीमेक 1979 में रिलीज हुई। तेलुगू फिल्म ने जया को दक्षिण में सुपरस्टार बनाया था और हिंदी फिल्म ने उन्हें यही रुतबा हिंदी सिनेमा में दिलाया।
1979 में ही श्रीदेवी ने भी फिल्म ‘सोलवां सावन’ से डेब्यू किया था, लेकिन उनको स्टारडम मिला 1983 में रिलीज हुई फिल्म ‘हिम्मतवाला’। श्रीदेवी ने हिंदी सिनेमा में इसके बाद एक के बाद एक हिट फिल्मों की लाइन लगा दी। अब जया प्रदा से इस बारे में बात चलने पर वह कहती हैं कि श्रीदेवी और उनके बीच कभी कोई भावनात्मक नाता नहीं रहा। सेट पर भी वे एक दूसरे पर कोई ध्यान नहीं देते थे।
श्रीदेवी के साथ अपने रिश्ते के बारे में जया प्रदा कहती हैं, "हमारे बीच कभी कोई आपसी मतभेद नहीं रहे लेकिन हमारी केमिस्ट्री कभी मेल नहीं खाई। हमने कभी एक दूसरे को आंखों में आंखें डालकर नहीं देखा क्योंकि कपड़ों से लेकर डांस तक हम दोनों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा रहती थी। जब भी हमें सेट पर एक दूसरे से मिलाया जाता, तो हम एक दूसरे को नमस्ते कहकर आगे बढ़ जाते थे।”
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जया प्रदा, जितेंद्र, राजेश खन्ना और श्रीदेवी
जया प्रदा ने इस दौरान वह किस्सा भी साझा किया जब उन्हें श्रीदेवी के साथ एक ही मेकअप रूम में बंद कर दिया गया। वह बताती हैं, “मुझे अब भी याद है फिल्म 'मकसद' की शूटिंग के दौरान जीतू जी (जीतेंद्र) और राजेश खन्ना ने करीब एक घंटे तक हमें मेकअप रूम में बंद कर दिया था लेकिन हमने एक दूसरे से एक शब्द भी नहीं कहा। आज वो हमारे बीच नहीं हैं तो मैं उन्हें बहुत मिस करती हूं। मैं बहुत अकेला महसूस करती हूं क्योंकि इस इंडस्ट्री में वही मेरी जानी-मानी कॉम्पीटीटर थीं। यदि वे कहीं मुझे सुन रही हैं, तो इस मंच के जरिए मैं सिर्फ इतना कहूंगी कि काश हम एक दूसरे से बात कर पाते।"