उत्तराखंड के चमोली में रविवार को ग्लेशियर के टूटने से प्राकृतिक आपदा आई। विशेषज्ञ अभी इसे Glacial Lake Outburst Flood यानी ग्लेशियल झील का बाढ़ प्रकोप बता रहे हैं। इस आपदा में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। ग्लेशियर के टूटने, हिमस्खलन और बादल फटने से भी अक्सर बड़ी आपदाएं आती हैं। लेकिन वास्तव में, जिस मौसम में ऐसी आपदा देखी गई थी, उसने विशेषज्ञों को आश्चर्यचकित किया है क्योंकि कोई ऐसा तत्काल कारण नहीं है, जो इसके लिए जिम्मेदार हो। यह आपदा दो जलविद्युत परियोजनाओं को भी तबाह कर गई। इससे जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को लेकर विशेषज्ञों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। हर बर्फीले पहाड़ के टूटने को हम सामान्य तौर पर हिमस्खलन समझते हैं, लेकिन आइए जानते हैं इनमें क्या है अंतर ...
चमोली में किसने मचाई तबाही, जानिए GLOF, Cloudburst या Avalanche कौन है जिम्मेदार
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सामान्य तौर पर समझने की कोशिश करें तो ग्लेशियर टूटने या बर्फीले पहाड़ के टूटने और तेजी से बर्फ पिघलने के कारण हिमनद यानी पहाड़ी झीलों या नदियों के उद्गम स्थलों से जल प्रवाह अचानक बढ़ जाता है। नदियां उफान पर आ जाती हैं। इस दौरान, अक्सर उन पर बने छोटे-बड़े बांध पानी के तेज आवेग से टूट जाते हैं। बांध टूटने से क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति बन आती है और जलजले के कारण जानमाल का नुकसान होता है। लेकिन विशेषज्ञ इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि रविवार को उत्तराखंड के चमोली में बड़े पैमाने पर ग्लेशियर क्यों फटा, लेकिन इस घटना ने जलवायु परिवर्तन के खतरों पर ध्यान केंद्रित किया है। उत्तराखंड राज्य में इन खतरों से जुड़ी आशंकाएं ज्यादा हैं। 2013 में, राज्य में बादल फटने से तबाही आई थी। उस तबाही को केदारनाथ त्रासदी के नाम भी जाना जाता है। तब भयावह बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुई थी।
ग्लेशियर के टूटते क्यों हैं?
सामान्य तौर पर ध्रुवीय ऊंचाई वाले क्षेत्रों में वर्षों से जमा हो रही बर्फ ग्लेशियर बनाती है। ग्लेशियर बर्फ के ढेर होते हैं। वैश्विक विकास की अंधाधुंध दौड़ के कारण लगातार पिछले कुछ दशकों से धरती की तपन बढ़ रही है। जिसे हम ग्लोबल वार्मिंग के तौर पर जानते हैं। वैश्विक तपन के कारण बर्फीले पहाड़ पिघल रहे हैं। पिघलने ने ग्लेशियर कमजोर पड़ते हैं और टुकड़ों में टूटकर गिरने लगते हैं। जिससे समुद्री और नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है।
ग्लेशियल झील का बाढ़ प्रकोप क्या है?
चमोली में जो हुआ, उसे जीएलओएफ यानी Glacial Lake Outburst Flood के रूप में देखा जा रहा है। एक ग्लेशियर में एक टूटन बहुत असामान्य घटना नहीं है। बर्फ पिघलने के कारण जब ग्लेशियर खिसकते हैं या पीछे हटते हैं, तो वे एक ऐसी जगह छोड़ देते हैं, जो पानी से भरी झील बन जाती है। इस ग्लेशियल लेक को हम यानी हिमनद और पहाड़ी झील कह सकते हैं। जब इस तरह की झील टूटती है, तो इसे ग्लेशियल झील के प्रकोप बाढ़ के रूप में जाना जाता है।
तो क्या चमोली में हिमस्खलन हुआ था?
अभी इस बात की वैज्ञानिक तौर पर जांच नहीं की गई है कि चमोली में असल में क्या हुआ था? कुछ सवाल हैं जैसे- क्या हाल ही में इस क्षेत्र में हिमस्खलन हुआ था या किसी निर्माण कार्य की वजह से ऐसा हुआ या यह मानवीय गतिविधियों अथवा जलवायु परिवर्तन आदि का परिणाम था। माना जाता है कि रविवार का जलप्रलय नंदादेवी ग्लेशियर के टूटने के कारण हुआ था। कंचनजंगा के बाद नंदादेवी दूसरा सबसे ऊंचा पर्वत है।
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