अमेरिका के बॉबसन कॉलेज से 3.80 करोड़ की स्कॉलरशिप मिलने के बाद सुदीक्षा भाटी ने आईएएस बनने का सपना छोड़ दिया है। अब वह बिजनेस में भविष्य बनाना चाहती हैं। सुदीक्षा का कहना है कि आईएएस बनने के बाद काफी बंदिशें रहेंगी।
सुदीक्षा दादरी के डेरी स्कनर गांव की रहने वाली हैं। इस समय उसका परिवार धूम-मानिकपुर में रहता है। सुदीक्षा बुलंदशहर के विद्या ज्ञान लीडरशिप अकादमी में पढ़ती थी। 2011 में स्कूल की प्रवेश परीक्षा पास कर कक्षा छह में दाखिला लिया था। उसके बाद हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की।
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सुदीक्षा भाटी
- फोटो : अमर उजाला
कक्षा 12वीं में 98 प्रतिशत अंक लाकर सुदीक्षा ने बुलंदशहर में पहला स्थान हासिल किया था। सुदीक्षा ने बताया कि स्कूल की तरफ से बॉबसन कॉलेज में स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया गया था। 13 जून को कॉलेज से 3.80 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप मिलने की जानकारी मिली थी। 17 अगस्त को चार साल के लिए अमेरिका रवाना हो जाऊंगी।
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सुदीक्षा भाटी
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बेटा और बेटी में नहीं किया अंतर
सुदीक्षा के पिता जितेन्द्र भाटी ढाबा संचालक हैं। उन्होंने बताया कि सुदीक्षा की तीन बहनें और दो भाई हैं। सबसे बड़ी सुदीक्षा है। उसने कभी भी बेटा-बेटी में अंतर नहीं किया।
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सुदीक्षा भाटी के परिजन
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लड़कियों को पढ़ने के लिए करती हैं प्रेरित
सुदीक्षा पढ़ने में तेज है। पढ़ाई के अलावा लिखने और पढ़ने का शौक है। खाली समय में बच्चों को पढ़ाती है। पढ़ाई को कभी भी बोझ नहीं माना। स्वास्थ्य का खास ध्यान रखती है। स्कूल की छुट्टियों में आसपास की लड़कियों को पढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
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