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उधार लिए बैडमिंटन से करते थे प्रैक्टिस, आज हैं स्टेट चैम्पियन

Fri, 17 Nov 2017 03:48 PM IST
amarujala.com- Written by: अपूर्वा राय
amarujala.com- Written by: अपूर्वा राय Updated Fri, 17 Nov 2017 03:48 PM IST
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Success story of state champion Roshan Singh
रोशन सिंह

अब तक आप सुनते आएं होंगे कि कामयाब होने के लिए जरूरी है सुबह जल्दी उठना। लेकिन सफल होने के लिए कई लोग ऐसे होते हैं जो दिन रात किसी की भी परवाह किए बिना काम करते हैं। आज की कहानी है रोशन सिंह की।



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Success story of state champion Roshan Singh
रोशन सिंह

सर्दी हो या गर्मी, धूप हो या बरसात रोशन ने अपनी मेहनत में किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ी। 16 साल की उम्र में जब एक किशोर का ध्यान सुबह भरपूर नींद लेने पर होता है उस उम्र में रोशन साइकिल चला कर फिटनेस प्रैक्टिस के लिए जाते हैं। रोशन अपनी सुबह की शुरुआत एक्सरसाइज से करते हैं।

Success story of state champion Roshan Singh
रोशन

ये बात जानते हुए भी कि केवल फिटनेस के बलबूते ही वो खेल में आगे नहीं रह पाएंगे फिटनेस के साथ-साथ उन्हें बेहतर खान-पान की भी जरूरत है। रोशन के पास कोई विकल्प नहीं है, न ही उन्हें इसके लिए किसी से शिकायत हैं। रोशन एक ऐसे परिवार से आते हैं जहां दो वक्त की रोटी के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।

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Success story of state champion Roshan Singh
रोशन
बोलंगीर के रहने वाले रोशन सिंह 2015 के सब जूनियर स्टेट चैंपियन रह चुके हैं। रोशन एक ऐसे परिवार से आते हैं जिन्हें दो वक्त की रोटी के लिए भी गोलगप्पे बेचने पड़ते हैं। एक ऐसा परिवार जहां 1 गिलास दूध मिलना भी मुश्किल है ऐसे में एक स्पोर्ट्स पर्सन बनने के सपने को पूरा करना बेहद मुश्किल था। खेलने के लिए उनके पास एक रैकेट तक नहीं था लेकिन फिर भी उन्होंने बैडमिंटन की प्रैक्टिस जारी रखी। बेशक उसकी प्रैक्टिस वो अपने दोस्त से उधार लिए रैकेट से करते थे।
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Success story of state champion Roshan Singh
रोशन अकादमिक में उतने ही अच्छे हैं जितने स्पोट्स में और फिलहाल वो कॉमर्स प्लस टू के छात्र हैं। उन्होंने 10 वीं सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा में 9.4 सीजीपीए अंक हासिल किए। हालांकि उन्हें पढ़ाई ने उतना आकर्षित नहीं किया जितना स्पोर्ट्स ने। रोशन के स्टेट चैंपियनशिप जीतने के बाद उनके परिवार के लोगों और दोस्तों को इसकी जानकारी मिली। शायद इसीलिए क्योंकि रोशन घर में ज्यादा नहीं बोलते। रोशन ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य को हासिल किया और कठिनाइयों के बीच सफलता की राह निकाल ली। 
हमें उम्मीद है कि एक दिन रोशन वर्ल्ड चैंपियन भी जरूर बनेंगे।
 
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