'लहरों से डरने वालों की नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।'
कहते हैं कि कुछ करने के लिए उम्र और तर्जुबे से ज्यादा जज्बे की जरूरत होती है। ऐसी ही एक मिसाल हैं पश्चिम बंगाल के नारायण मजूमदार। 3 रुपये रोजाना कमाने वाले मजूमदार आज 255 करोड़ की कंपनी के मालिक हैं। नारायण मजूमदार ने दूध बेचकर 255 करोड़ का बिज़नेस खड़ा कर लिया।
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मजूमदार आज पश्चिम बंगाल के आठ जिलों में फैले तीन दूध प्रसंस्करण संयंत्रों और 22 दूध शीतल संयंत्रों के मालिक हैं। उनकी कंपनी रेड काव डेयरी प्राइवेट लिमिटेड आज पूर्वी भारत में दूध और दूध उत्पादों की सबसे बड़ी आपूर्तिकर्ता डेयरी है।
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25 जुलाई 1958 को पश्चिम बंगाल के नाडिया जिले के फुलिया गांव में पैदा हुए नारायण तीन भाई-बहनों में दूसरे हैं। उनकी दो बहनें हैं। नारायण के पिता एक किसान थे जबकि उनकी मां बसंत मजूमदार एक गृहिणी थीं।
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1975 में नारायण ने हरियाणा के करनाल में राष्ट्रीय डेयरी इंस्टीट्यूट से डेयरी टेक्नोलॉजी में बीटेक की शुरुआत की। परिवार के खर्चे के लिए नारायण को कई नौकरियां करनी पड़ी।जहां उन्हें महज 3 रुपये मिलते थे।
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नारायण ने कई सालों तक नौकरी की। कभी 13 हजार पर तो कभी 50 हजार पर लेकिन खुद का व्यवसाय शुरू करने के आइडिया ने नारायण को करोड़पति बना दिया। शुरुआत में उन्होंने किसानों से दूध खरीदना शुरू किया और फिर वही दूध उसी फर्म को बेंचना शुरू किया जिसके लिए नारायण काम किया करते थे।
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