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मां की असहनीय तकलीफ से मिली प्रेरणा, बनाया कुछ ऐसा, लाखों को मिलेगा फायदा

Fri, 20 Jan 2017 11:19 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 20 Jan 2017 11:19 AM IST
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Success Story Of Chintakindi Mallesham Of Laxmi Asu Machine
- फोटो : YourStory
हैंडलूम साड़ियों की भारत में काफी डिमांड रहती है। लेकिन काफी कम लोग जानते हैं कि इसे बनाने के पीछे कारीगरों की कड़ी मेहनत होती है। इन साड़ियों को कारीगर हाथ से बनाते हैं। इसी तकलीफ को कम करने के लिए Chintakindi Mallesham ने ऐसी मशीन का निर्माण किया है जिससे साड़ियों को हाथ की बजाय मशीन से बनाया जा सके।
Success Story Of Chintakindi Mallesham Of Laxmi Asu Machine
तेलंगाना में जन्में Mallesham ने छठी क्लास में ही स्कूल छोड़ दिया था। वह साड़ी बनाने वालों के घर में पैदा हुए थे। वह यह मान बैठे थे कि उनकी जिंदगी में भी साड़ी बनाना ही लिखा था। लेकिन साड़ी बनाते वक्त कारीगर जिस तकलीफ से गुजरते थे, वह देख के उन्हें काफी दुख होता था। एक दिन जब उनकी मां ने कहा कंधे में दर्द के चलते वह और काम नहीं कर पाएंगी, उस दिन Mallesham ने तय किया कि वह इस दर्द को कम करने के लिए कुछ करेंगे।
Success Story Of Chintakindi Mallesham Of Laxmi Asu Machine
मशीनों के बारे में जानने के लिए वह हैदराबाद चले गए जहां वह दिन में काम करते थे और फिर मशीनों चलाना सीखते थे। कई सालों की मेहनत के बाद वह आखिरकार सफल हुए। इस मशीन का नाम उन्होंने अपनी मां के नाम पर रखा- लक्ष्मी असु मशीन। इन मशीनों ने हैंडलूम कारीगरों की जिंदगी ही बदल दी। जिस एक साड़ी को बनाने में 5-6 घंटे लग जाते थे वहीं अब मशीन से साड़ी सिर्फ 1-2 घंटे में तैयार हो जाती है।
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Success Story Of Chintakindi Mallesham Of Laxmi Asu Machine
Mallesham के द्वारा तैयार की गई मशीन की खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तारीफ कर चुके हैं। 2016 में उन्हें को प्रधानमंत्री ने 'अमेजिंग इंडियन अवार्ड' से सम्मानित किया गया। फोर्ब्स ने भी अपनी '7 सबसे शक्तिशाली ग्रामीण भारतीय उद्यमियों' की सूची में शामिल किया था।
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Success Story Of Chintakindi Mallesham Of Laxmi Asu Machine
Mallesham अब इस मशीन की फैक्टरी चलाते हैं। वह अब तक 800 मशीनें कारीगरों तक पहुंचा चुके हैं। वह उम्मीद करते हैं कि जल्द ही मशीने सभी कारीगरों के पास पहुंच जाएंगी।
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