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Kargil War Hero Digendra: पांच गोली खाकर काटी पाकिस्तानी मेजर की गर्दन, 48 को मारकर वापस दिलाई तोलोलिंग चोटी

Fri, 21 Jul 2023 12:48 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Fri, 21 Jul 2023 12:48 PM IST
सार

कारगिल हीरो के नाम से विख्यात नायक दिगेंद्र कुमार की कहानी किसी फिल्म के हीरो से कम नहीं है। उन्होंने 48 पाकिस्तानी सैनिकों को मारकर न केवल देश को बड़ी कामयाबी दिलाई बल्कि पांच गोलियां लगने के बावजूद पाकिस्तानी मेजर की गर्दन काटते हुए तोलोलिंग की चोटी पर तिरंगा फहराया। यहां विस्तार से पढ़ें नायक दिगेंद्र कुमार की वीर गाथा... 

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Kargil Vijay Diwas 2022 Kargil War Hero Naik Digendra Kumar Know About in Details
Kargil War Hero Naik Digendra Kumar Cobra - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

Mahaveer Chakra Awardee Kargil Hero Naik Digendra Kumar: कोबरा दिगेंद्र कुमार देश का वह नायक जिन्हें 30 साल की उम्र में तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने देश दूसरे सबसे बड़े गैलेंट्री अवॉर्ड महावीर चक्र से नवाजा था। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने अपनी टीम के सहयोग से 48 पाकिस्तानी सैनिकों को मारकर न केवल देश को बड़ी कामयाबी दिलाई बल्कि पांच गोलियां लगने के बावजूद पाकिस्तानी मेजर की गर्दन काटते हुए तोलोलिंग की चोटी पुन: फतह की और 13 जून की प्रभात बेला में तिरंगा लहरा दिया। यहां विस्तार से पढ़िए कारगिल के हीरो कोबरा नायक दिगेंद्र कुमार की वीर गाथा...

Kargil Vijay Diwas 2022 Kargil War Hero Naik Digendra Kumar Know About in Details
Kargil War Hero Naik Digendra Kumar Cobra - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
राजस्थान में जन्म, सैन्य माहौल में पले-बढ़े, राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए

राजस्थान के सीकर जिले की नीमकाथाना तहसील के एक गांव में जाट परिवार में जन्मे, दिगेंद्र बचपन से सैन्य माहौल में पले-बढ़े। उनके नाना स्वतंत्रता सेनानी रहे थे तो पिता भारतीय सेना के वीर योद्धा रहे। 1947-48 के युद्ध के दौरान दिगेंद्र के पिता शिवदान सिंह के जबड़े में 11 गोलियां लगी थीं, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी थी। अपने पिता से प्रेरित दिगेंद्र कुमार 2 राजपूताना राइफल्स में भर्ती हो गए थे।

राजपूताना राइफल्स में भर्ती के दो साल बाद 1985 दिगेंद्र कुमार को श्रीलंका के जंगलों में प्रभाकरण के तमिल टाइगर्स के खिलाफ अभियान के लिए गई इंडियन पीस कीपिंग फोर्स में भेजा गया। इस अभियान के दौरान ही एक ही दिन में दिगेंद्र ने आतंकियों को मार गिराया, दुश्मन का गोला-बारूद का ठिकाना नष्ट किया और उनके कब्जे से पैराट्रूपर्स को छुड़ाया था। यह सब अचानक हुआ था, जब वह अपने जनरल के साथ गाड़ी से जा रहे थे और रास्ते में पुल के नीचे से लिट्टे के कुछ आतंकियों ने जनरल की गाड़ी पर हेंड ग्रेनेड फेंका था, दिगेंद्र ने उसी ग्रेनेड को कैच किया और वापस आतंकियों की ओर उछाल दिया था।

Kargil Vijay Diwas 2022 Kargil War Hero Naik Digendra Kumar Know About in Details
Kargil War Hero Naik Digendra Kumar Cobra - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

कुपवाड़ा में एरिया कमांडर का खात्मा किया
इसके कुछ साल बाद उन्हें कश्मीर के कुपवाड़ा में भेजा गया। जहां उन्होंने आंतकियों का काम तमाम करना जारी रखा। उन्होंने एरिया कमांडर आतंकी मजीद खान का खात्मा किया। अपनी वीरता तथा शौर्य के लिए सेना मेडल से सम्मानित किए गए। इसके तकरीबन सालभर बाद ही 1993 में दिगेंद्र कुमार ने हजरतबल दरगाह को आंतकियों के चंगुल से आाजद कराने में अहम भूमिका निभाई थी। जिसके लिए भी उन्हें सराहना मिली। लेकिन दिगेंद्र के लिए यह सब छोटी उपलब्धियां थीं। वह बेबाक और निर्भीक योद्धा अपनी मातृभूमि के लिए कुछ बड़ा करना चाहता था। इसका उसे मौका भी मिला। 

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Kargil War Hero Naik Digendra Kumar Cobra - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

राह में जो भी आया, उसका फुर्ती से खात्मा किया
1999 के आते-आते नायक दिगेंद्र कुमार उर्फ कोबरा सेना के बेहतरीन कमांडों में गिने जाने लगे थे। इसी वर्ष 13 जून के दिन जो हुआ उसने दिगेंद्र कुमार को जीते जी अमर कर दिया। उन्होंने 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित तोलोलिंग की चोटी और पोस्ट जीता बल्कि उस पर तिरंगा फहराकर हिंदुस्तान को पहली बड़ी एवं महत्वपूर्ण कामयाबी दिलाई। इस अभियान के दौरान उन्हें पांच गोलियां लगीं, लेकिन वे न रुके, न थके, न अटके, न भटके और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते चले गए। उनकी राह में जो भी आया, उसका फुर्ती के साथ खात्मा करते गए। 

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तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक

तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल मलिक ने पूछा था प्लान
कारगिल युद्ध छिड़ने के बाद दिगेंद्र की यूनिट 2 राजपूताना राइफल्स को 24 घंटें में कुपवाड़ा से पहुंचने और अगले 24 घंटे में जंगी मोर्चा संभालने के लिए तैयार रहने का निर्देश मिला था। तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने तैयारी बैठक ली। इसमें दिगेंद्र कुमार ने उन्हें तोलोलिंग चोटी पर चढ़ाई की अपनी योजना समझाई।



जनरल मलिक के निर्देशानुसार नायक दिगेंद्र को घातक टीम का कमांडर बनाया गया और उनके कमांडिंग ऑफिसर मेजर विवेक गुप्ता को बनाए गए। बफीर्ली पहाड़ी पर ठंड की कंपकपाहट के साथ रात के सन्नाटे में 12 जून की रात को चढ़ाई पूरी की। पाकिस्तानी सेना ने वहां 11 बंकर बना रखे थे। पहला और आखिरी बंकर दिगेंद्र कुमार ने उड़ाया। 

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