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अगर आपके आइडिया में दम है तो फिर आपकी सफलता को कोई नहीं रोक सकता है। यह कहना है नौकरीपेशा से बिजनेसमैन बने अश्वनी शर्मा का। अश्वनी शर्मा का सफर संघर्ष से जुड़ा है। अश्वनी सोलन के पास एक छोटे से गांव जौलाजी के रहने वाले है। उनकी पढ़ाई लिखाई भी सोलन के इसी गांव के सरकारी स्कूल में हुई। 12वीं तक शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन सोलन के सरकारी कालेज से की।
अश्वनी बताते हैं कि उनको साइंस पसंद थी लेकिन साइंस स्ट्रीम लेने पर खर्च ज्यादा था। इसी वजह से उन्होंने आर्ट संकाय में प्रवेश लिया। अश्वनी शर्मा ने बताया कि वर्ष 2002 में पिता स्वर्गीय इंदरदत्त शर्मा का देहांत हो गया। घर में तीन भाई थे और तीनों ही बेरोजगार। क्या करते सवाल सामने था? ऐसे में उन्होंने ठाना कि पढ़ाई भी करेंगे और जॉब भी। उन्होंने यहीं मार्केटिंग की जॉब शुरू की और कालेज में पढ़ाई करते रहे।
कई बार ड्रामेटिक में राष्ट्रीय स्तर की गतिविधियों में भाग भी लिया। धीरे धीरे काम बेहतर होने लगा और उनको 2006 में अच्छी कंपनी में आफर मिल गया। वर्ष 2009 में एक आईटी कंपनी में बिजनेस डवलपमेंट के लिए मैनेजर के रूप में ज्वाइन किया और फिर धीरे धीरे यहीं से उनको कई देशों में जाने का मौका मिला। थाईलैंड, मलेशिया और दुबई जैसे देशों में जाने का मौका मिला। यहीं उनकी मुलाकात एक दोस्त रजत से हुई।
उन्होंने बताया कि जब वह दुबई के एक ट्रिप पर थे तो घर से एक मैसेज आया और उसके बाद उनका फोन बंद हो गया। वह काफी परेशान हुए और जब रजत से इस बात की चर्चा की। फिर उनको दुबई में कुछ पिंक कैब दिखाई दीं जिनको महिलाएं चलाती थीँ। बस वहीं से आइडिया जन्मा और वहीं से शुरुआत हो गई अपने बिजनेस की।
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