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एक चिट्ठी ने बदली इस खिलाड़ी की जिंदगी, अब है भारतीय टीम का हिस्सा

Fri, 22 Sep 2017 12:18 PM IST
अशोक प्रियदर्शी
अशोक प्रियदर्शी Updated Fri, 22 Sep 2017 12:18 PM IST
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Asian Women Club League Handball Championship success story of women handball captain khushboo

"कोई दिन ऐसा नही होता था जब मैं रोती नहीं थी। रोज दोस्तों  को मैदान पर खेलने जाते हुए देखती, मन करता था कि भाग जाऊं, कुछ कर लूं। बहुत परेशान थी। कुछ समझ नहीं आता था। दो दिन तक खाना भी नहीं खाया था।" ये शब्द हैं बिहार की महिला हैंडबॉल टीम की कैप्टन ख़ुशबू के, जिनके खेलने पर परिवारवालों ने दो साल पहले बंदिश लगा दी थी। मगर अब वह उज्बेकिस्तान के ताशकंद में 23 सितंबर से 2 अक्तूबर तक होने जा रही एशियन महिला क्लब लीग हैंडबॉल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली हैं।



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खुशबू मूलत: बिहार के नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के भदौर गांव की रहने वाली हैं। उनके माता-पिता पटेल नगर में रहते हैं। पिता अनिल कुमार आटा चक्की चलाते हैं और इसी से परिवार का गुज़ारा चलता है। खुशबू  की एक बहन है बीएसएफ़ में एसआई हैं और भाई विद्युत विभाग में काम करते हैं।

घरवालों ने लगा दी थी बंदिश

Asian Women Club League Handball Championship success story of women handball captain khushboo

आज खुशबू भारतीय हैंडबॉल महिला टीम में बिहार की एकमात्र खिलाड़ी हैं। शायद आज वो इस जगह नहीं होती, लेकिन उस एक चिट्छी ने उनकी जिंदकी को बदल डाला। खुशूबू ने बताया कि खेल की प्रैक्टिस की वजह से वो कभी-कभी देर रात घर पहुंचती थी। कोई लड़की यह खेल नहीं खेलती थी, ऐसे में प्रैक्टिस लड़कों के साथ होती थी। आस-पड़ोस का कोई देख लेता था तो मम्मी-पापा को ताने मारने लगता था। पड़ोसियों के दबाव में आकर घरवालों ने उनके खेलने पर रोक लगा दी।

एक लेटर ने बदल दी जिंदगी
खुशबू ने बताया कि एक महीने तक उन्हें घर से निकलने नहीं दिया गया। उन्होंने भी आम लड़कियों की तरह जीना सीख लिया था और उन्हें ये भी लगने लगा कि वो अब कभी नहीं खेल पाएंगी। मगर खुशबू जब हताश हो चुकी थीं,  एक चिट्ठी उनके लिए उम्मीदें लेकर आई। खुशबू बताती हैं, "उस समय इंडिया कैंप का एक लेटर आया था, जिसमें बारहवें सैफ खेलों के लिए मेरा चयन हुआ था। मैंने घरवालों को विश्वास दिलाया, उन्हें मनाया, एक चांस मांगा।" ख़ुशबू बताती हैं कि मां ने तो मदद की, मगर पापा ने सपॉर्ट नहीं किया, फिर भी घरवाले किसी तरह एक मौका देने के लिए तैयार हो गए।

2015 में किया बेहतर प्रदर्शन

Asian Women Club League Handball Championship success story of women handball captain khushboo

बंदिश के बाद खुशबू जब घर से बाहर निकलीं तो उनका आत्मविश्वास बढ़ चुका था। वह 2015 में बांग्लादेश के चटगांव में आयोजित गेम्स में भारतीय टीम में शामिल हुईं और बेहतरीन प्रदर्शन किया। 2016 में वियतनाम में आयोजित पांचवें एशियन बीच गेम्स में भी उन्होंने हिस्सा लिया। आज वह बिहार पुलिस में भी काम कर रही हैं।
 

आज माता-पिता को है नाज

भले ही पहले माता-पिता को खुशबू का खेलना पसंद नहीं था, मगर अब उन्हें अपनी बेटी पर नाज़ है। खुशबू की मां प्रभा देवी कहती हैं, "हमारे यहां लड़कियां कम खेलती थीं। लोग आकर शिकायत करते थे तो हमने इसका खेल छुड़वा दिया। फिर खुशबू ने कहा कि एक मौका दे दो, मैं बढ़िया खेलकर दिखा दूंगी।" वह याद करती हैं, "खुशबू जब बांग्लादेश में अच्छा प्रदर्शन करके लौटी तो साथी खिलाड़ियों ने उसका ज़ोरदार स्वागत किया। घर के बाहर ढोल बजाते हुए भीड़ आ रही थी। पहले लगा कि किसी की शादी होगी, मगर बाहर देखा तो खुशबू फूलमालाओं से लदी थी।" प्रभा बताती हैं कि अब माहौल बदल गया है और लोग कहने लगे हैं कि आपकी बेटी नाम कर रही है।

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दादा तो अब भी नाराज़ हैं

Asian Women Club League Handball Championship success story of women handball captain khushboo

खुशबू के पापा अनिल भी अब बेटी के आगे बढ़ने से ख़ुश हैं। वह कहते हैं, "लोग बोलते थे कि आपकी बेटी लड़कों के साथ खेलती है। बुरा लगता था। हम छोटे आदमी हैं। हमें लगता था कि ऐसी बात फैल जाएगी तो उसकी शादी में दिक्कत होगी। मगर आज हम बाज़ार से निकलते हैं तो लोग बहुत इज्जत देते हैं।" बाकी लोग तो ख़ुश हैं, मगर खुशबू के दादा आज भी नाराज़ हैं। उन्होनें तो यहां तक कह दिया था कि ख़ुशबू की शादी जल्दी करवा दो। आज तक  उन्होंने खुशबू को शुभकामनाएं नहीं दी हैं।

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2008 में नवादा में 54वें नेशनल स्कूल गेम्स का आयोजन हो रहा था। हैंडबॉल की गर्ल्स टीम नहीं थी। तभी प्रोजेक्ट स्कूल की आठवीं की छात्रा ख़ुशबू को टीम में शामिल किया गया और इस टीम ने जीत भी हासिल की। इसके बाद उन्हें कैप्टन बनाया गया। वह लगातार बिहार की बेस्ट खिलाड़ी के ख़िताब से नवाज़ी जाती रही हैं। हैंडबॉल के जानकर खुशबू के खेलने की शैली के मुरीद हैं।

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'जबरदस्त खिलाड़ी है खुशबू'

Asian Women Club League Handball Championship success story of women handball captain khushboo
बिहार हैंडबॉल पुरुष टीम के कप्तान कनक कुमार ने  बीबीसी से कहा, "खुशबू का फ़ेकिंग स्टाइल बहुत अच्छा है। अकेला डिफ़ेंडर उसे रोक नही पाता। इसके लिए दो खिलाड़ियों की ज़रूरत पड़ती है। दूसरी ख़ासियत है उसका बॉल दागने का अंदाज़। गोलकीपर भी धोखा खा जाता है।''

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भारतीय हैंडबॉल गर्ल्स टीम के मुख्य कोच शिवाजी सिंधु ने बीबीसी से कहा, "वह एशियन चैम्पियनशिप में पहली दफ़ा मेरे साथ जा रही है, मगर इसके पहले एशियन बीच गेम में गई थी और काफ़ी बढ़िया खेली थी। उसमें काफ़ी इंप्रूवमेंट है। वह काफी मेहनत कर रही है और आने वाले समय में और बेहतर करेगी।"

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