भारत को 15 अगस्त 1947 के दिन अंग्रेजी हुकुमत से आजादी मिली थी। इसके बाद से हर साल 15 अगस्त को हम स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं। भारत को अंग्रेजों से आजाद कराने में कई स्वतंत्रता सेनानियों का अहम योगदान रहा है। 15 अगस्त 2023 को देश की आजादी को 76 वर्ष पूरे हो रहे हैं। पिछले साल 75 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर में हर घर तिरंगा अभियान के तहत गांव से लेकर शहर के लोगों को तिरंगा लहराने की अपील की थी। इस साल भारत 'राष्ट्र पहले, हमेशा पहले' (Nation First, Always First) थीम के तहत स्वतंत्रता दिवस मनाने वाला है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्कूल से लेकर दफ्तर तक हर जगह तिरंगा फहराया जाता है। जिस तिरंगे को हम हर साल फहराते है, इसके पीछे की कहानी बहुत कम लोगों को ही मालूम होगी। दरअसल, भारतीय तिरंगे की कहानी बहुत लंबी है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज 117 सालों में छह बार बदला जा चुका है। ध्वज में आखिरी बदलाव 1947 में किया गया था और तभी से इसे तिरंगा के नाम से जाना जाता है।
1906 में मिला पहला राष्ट्रीय ध्वज
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History of Indian National Flag
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
भारत में आजादी की लड़ाई जैसे-जैसे तेज हो रही थी, क्रांतिकारी दल अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र राष्ट्र की अलग पहचान के लिए अपना झंडा प्रस्तावित कर रहे थे। साल 1906 में कलकत्ता में भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। उस समय फहराए गए राष्ट्रीय ध्वज की बनावट बिलकुल अलग थी। इस झंडे में तीर रंग- हरे, पीले और लाल रंग की पट्टियां थीं। इसमें ऊपर की हरे रंग वाली पट्टी में आठ कमल के फूल थे, जिनका रंग सफेद था। बीच की पीली पट्टी में नीले रंग से वन्दे मातरम् लिखा हुआ था। इसके अलावा सबसे नीचे वाली लाल रंग की पट्टी में सफेद रंग से चांद और सूरज के चित्र अंकित थे।
एक साल बाद ही बदल दिया गया राष्ट्रीय ध्वज
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- फोटो : Bharatkosh
एक साल बाद ही 1907 में देश का दूसरा नया झंडा प्रस्तावित किया गया। इस नए झंडे की संरचना पुराने झंडे से कुछ अलग थी। मैडम भीकाजीकामा और उनके कुछ क्रांतिकारी साथियों, जिन्हें निर्वासित कर दिया गया था, ने मिलकर पेरिस में भारत का नया झंडा फहराया था। इस झंडे में केसरिया, पीले और हरे रंग की तीन पट्टियां थी। बीच में वन्दे मातरम् लिखा था। वहीं, इसमें चांद और सूरज के साथ आठ सितारे भी बने थे।
1917 में एनी बेसेंट और तिलक ने फहराया नया झंडा
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- फोटो : Bharatkosh
करीब एक दशक के बाद ही 1917 में देश के लिए एक और नया झंडा प्रस्तावित किया गया। इस नए ध्वज को डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने फहराया था। इस बार झंडे में पांच रंग लाल और चार हरे रंग की पट्टियां थीं। झंडे के अंत की ओर काले रंग में त्रिकोणनुमा आकृति बनी थी। वहीं, बाएं तरफ के कोने में यूनियन जैक भी था। जबकि एक चांद और तारे के साथ, इसमें सप्तऋषि को दर्शाते सात तारे भी शामिल किए गए थे।
1921 में भी बदला गया भारत का राष्ट्रीय ध्वज
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- फोटो : Bharatkosh
चार साल के बाद एक बार फिर भारत के राष्ट्रीय ध्वज में बदलाव किए गए। साल 1921 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र के दौरान बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में आंध्र प्रदेश के एक व्यक्ति ने महात्मा गांधी को एक झंडा दिया था, यह हरे और लाल रंग का बना हुआ था। गांधीजी को यह झंडा पसंद आया और उन्होंने इसमें कुछ बदलाव करते हुए सफेद रंग की एक पट्टी जुड़वाई। इसके अलावा देश के विकास को दर्शाने के लिए बीच में चलता हुआ चरखा भी दर्शाया गया।
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