लोकसभा चुनाव 2019: देश को किसकी सरकार चलाएगी, उत्तर हर कोई जानने के लिए उत्सुक है। आज शाम से एग्जिट पोल के आधार पर कयास लगेंगे कि किसका पलड़ा भारी है। हम चुनाव से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्यों के बारे में बता रहे हैं, जिनके बारे में शायद आपको नहीं पता। यहां हम बात अमिट स्याही की कर रहे हैं। वोट डालने के बाद मतदाता के हाथ की अंगुली के नाखून पर गाढ़ी स्याही का निशान लगाया जाता है जो इस बात का सबूत होता है कि मतदाता वोट दे चुका है।
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लोकसभा चुनाव 2019: हमारे देश के अलावा इन देशों में भी चुनाव इंक का होता है इस्तेमाल
Sun, 19 May 2019 05:21 PM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Sun, 19 May 2019 05:21 PM IST
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जानें कब हुआ इसका पहली बार इस्तेमाल-
अमिट स्याही का इस्तेमाल पहली बार 1962 के तीसरे आम चुनाव में हुआ था। इसके पीछे कारण था फर्जी वोट्स को रोकना। आपको बता दें कि यह स्याही मैसूर में बनाई जाती है जो लगाने के बाद 60 सेकेंड में ही सूख जाती है।
मुख्य तथ्य-
- मैसूर के महाराजा नालवाड़ी कृष्णराज वाडियर ने 1937 में एक कंपनी मैसूर लैक एंड पेंट्स लिमिटेड बनाई थी, जो अब मैसूर पेंट्स एंड वॉर्निश लिमिटेड के नाम से जानी जाती है।
- यह स्याही सिंगापुर, थाइलैंड, नाइजीरिया, मलेशिया, पाकिस्तान, कनाडा, द. अफ्रीका सहित कई देशों को भेजी जाती है।
- पहली बार ये अमिट स्याही 1962 के आम चुनाव में इस्तेमाल हुई थी ताकि मतदान में फजीवाड़ा रोका जा सके।
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भारत के अलावा इन देशों में भी किया जाता है चुनावी स्याही का उपयोग-
अफगानिस्तान, अल्बानिया, बहामा, अल्जीरिया, मिस्र, ग्वाटेमाला, भारत, इंडोनेशिया, इराक, पाकिस्तान, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, निकारागुआ, पेरू, फिलीपींस, सेंट किट्स और नेविस, दक्षिण अफ्रीका , श्रीलंका , सूडान, सीरिया , ट्यूनीशिया , तुर्की , वेनेजुएला।
अफगानिस्तान, अल्बानिया, बहामा, अल्जीरिया, मिस्र, ग्वाटेमाला, भारत, इंडोनेशिया, इराक, पाकिस्तान, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, निकारागुआ, पेरू, फिलीपींस, सेंट किट्स और नेविस, दक्षिण अफ्रीका , श्रीलंका , सूडान, सीरिया , ट्यूनीशिया , तुर्की , वेनेजुएला।
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अंगुली पर अमिट स्याही लगाने का ये फैसला बेहद कारगर रहा। यही वजह है कि 2019 में भी इसी स्याही का इस्तेमाल हो रहा है। खास बात ये है कि इसके लिए किसी और विकल् के बार में सोचा नहीं गया है। । ये बताता है कि अंगुली पर स्याही लगाने का विचार और फैसला किस कदर काम आया है।
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