देश में हर राज्य का एक अपना अलग प्रतीक चिह्न है, जिसे उस राज्य की मुहर या स्टांप के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। झारखंड सरकार ने 15 अगस्त, 2020 को राज्य का नया स्टेट एंब्लेम यानी राज्य प्रतीक चिह्न जारी किया था। यह प्रतीक चिह्न उस राज्य की पहचान माने जाते हैं। आइए जानते हैं कुछ प्रमुख राज्यों के प्रतीक चिह्न और क्या हैं उनके मायने...
झारखंड ने 2020 में बदल दिया था अपना प्रतीक चिह्न, जानिए क्या होते हैं प्रतीक चिह्न और क्या हैं इनके मायने
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भारत का राजचिह्न सारनाथ स्थित अशोक के सिंह स्तंभ की अनुकृति है, जो सारनाथ के संग्रहालय में सुरक्षित है। मूल स्तंभ में शीर्ष पर चार सिंह हैं, जो एक-दूसरे की ओर पीठ किए हुए हैं। इसके नीचे घंटे के आकार के पदम के ऊपर एक चित्र वल्लरी में एक हाथी, चौकड़ी भरता हुआ एक घोड़ा, एक सांड तथा एक सिंह की उभरी हुई मूर्तियां हैं, इसके बीच-बीच में चक्र बने हुए हैं। एक ही पत्थर को काट कर बनाए गए, इस सिंह स्तंभ के ऊपर 'धर्मचक्र' रखा हुआ है। भारत सरकार ने यह चिह्न 26 जनवरी, 1950 को अपनाया। इसमें केवल तीन सिंह दिखाई पड़ते हैं, चौथा दिखाई नहीं देता। पट्टी के मध्य में उभरी हुई नक्काशी में चक्र है, जिसके दाईं ओर एक सांड और बाईं ओर एक घोड़ा है। दाएं तथा बाएं छोरों पर अन्य चक्रों के किनारे हैं। आधार का पदम छोड़ दिया गया है। फलक के नीचे मुण्डकोपनिषद का सूत्र 'सत्यमेव जयते' देवनागरी लिपि में अंकित है, जिसका अर्थ है- 'सत्य की ही विजय होती है'।
झारखंड :
झारखंड के नए लोगो में देश के राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न अशोक स्तंभ के साथ झारखंड के लोक जीवन व संस्कृति, राज्य के राजकीय पुष्प के तौर पर पलाश के फूल, राज्य की प्राकृतिक खूबसूरती के लिए हरा रंग और राज्य के राजकीय पशु यानी कि हाथी को दर्शाया गया है। झारखंड राज्य का नया लोगो वहां की समृद्ध और अद्भुत सांस्कृतिक विरासत, राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली से आच्छादित वन संपदा और वन्य जीवों की संपूर्णता का उद्घोषक है।
बिहार :
बिहार का राज्य प्रतीक बोधि वृक्ष पर आधारित हैं। जिसकी टहनियों पर रुद्राक्ष की दो मालाएं टंगी हैं। वृक्ष के दोनों ओर स्वास्तिक बने हैं। नीचे की ओर चबूतरा नुमा आकृति बनी हुई है। दरअसल, बोधि वृक्ष बोध गया में स्थित एक प्राचीन अंजीर का पेड़ है, जिसे बौद्ध धर्म में पवित्र प्रतीक माना जाता है। गौतम बुद्ध को इसी वृक्ष के नीचे अनंत ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। रुद्राक्ष की माला पहनना आध्यात्मिकता का द्योतक है। जबकि स्वास्तिक हिंदू और बौद्ध धर्म में पवित्र प्रतीक माना जाता है।
छत्तीसगढ़ का लोगो 2000 में स्वीकार किया गया था। इसमें सबसे अंदर वाले गोले में अशोक स्तंभ बना हुआ है और नीचे सत्यमेव जयते लिखा हुआ है। इसके बाद की परिधि में धान की फसल पत्तियां बनी हुई हैं। जिनके नीचे की ओर तीन अलग-अलग रंगों की लाइन है जो राज्य की नदियों को दर्शाती है। इसके साथ में ऊर्जा उत्पादन को दर्शाने के लिए दो चिह्न बने हुए हैं। ऊपर की ओर छत्तीसगढ़ शासन लिखा हुआ है। जबकि तीसरे गहरे के बाहर की ओर 36 दुर्ग और किले नुमा कृतियां हैं, जो राज्य के नाम की परिचायक हैं।
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