चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) के विक्रम लैंडर (Vikram Lander) को चांद पर उतरे करीब 14 दिन हो चुके हैं। इतने समय तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO - Indian Space Research Organisation) के वैज्ञानिकों के साथ-साथ पूरे देश ने भी विक्रम से संपर्क की उम्मीद नहीं छोड़ी। लगातार इसरो इस कोशिश में लगा है कि किसी तरह विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित हो जाए।
Chandrayaan 2: आखिर क्यों नासा का LRO नहीं ले पाया विक्रम लैंडर की तस्वीर, यहां है कारण
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क्या है एलआरओ
- एलआरओ यानी लूनर रिकॉनसेंस ऑर्बिटर (LRO)।
- अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने 18 जून 2009 को इसे लॉन्च किया था। यानी आज से करीब 10 साल पहले।
- यह नासा का रोबोटिक स्पेस्क्राफ्ट है जो इस वक्त चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहा है।
- नासा के अनुसार, LRO से मिले डेटा को व8ह अपने आने वाले रोबोटिक व मानव मिशनों की योजना तैयार करने में इस्तेमाल करता है।
आगे जानें 10 साल पुराना यह LRO, चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर से कमजोर है या मजबूत?
नासा का LRO और उसमें इस्तेमाल हुई तकनीक आज से 10 साल पुरानी है। जबकि चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर में ऑप्टिकल हाई रिजॉल्यूशन कैमरा (OHRC) लगा है, जो आधुनिक तकनीक से बना है।
चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर में लगा कैमरा (OHRC) चांद की सतह पर पड़ी 30 सेमी ऊंचाई वाली वस्तु की तस्वीर ले सकता है। जबकि नासा का LRO इतनी छोटी चीज की तस्वीर नहीं ले सकता। उसकी सीमा 50 सेमी है। यानी साफ तौर पर यह चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर से कमजोर है।
सवाल है कि इसके बावजूद इसरो ने नासा की मदद क्यों ली? आगे पढें इसका कारण।
खगोलविदों के अनुसार इसरो के ऑर्बिटर का कैमरा ज्यादा ताकतवर है, लेकिन इसकी तस्वीर से विक्रम लैंडर की लैंडिंग की घटना का विश्लेषण नहीं किया जा सकता।
क्योंकि LRO के पास वहां का पुराना आंकड़ा मौजूद है। यानी वह बता सकता है कि चांद पर जिस जगह विक्रम लैंड हुआ, वहां लैंडिंग से पहले और बाद में क्या बदलाव हुए?
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विक्रम लैंडर की ऊंचाई करीब 3 मीटर है। यानी LRO आराम से इसकी तस्वीर ले सकता है। लेकिन एलआरओ को करीब 75 किमी की ऊंचाई से तस्वीर लेनी थी। वो भी तब जब चांद पर शाम हो चुकी थी। नासा ने पहले ही कहा था कि उन परिस्थितियों में तस्वीरें बिल्कुल साफ होंगी, इस बात की उम्मीद कम है। हुआ भी वही। एलआरओ विक्रम के पास से तो गुजरा, चंद्रमा की तस्वीर भी ली। लेकिन विक्रम को स्पॉट नहीं कर पाया।
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