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किसी अपराधी या आरोपी को पुलिस कब मार सकती है गोली, जानें क्या कहता है कानून

Sun, 08 Dec 2019 08:32 AM IST
बीबीसी Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Sun, 08 Dec 2019 08:32 AM IST
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Hyderabad Encounter case, When police can do encounter, SC NHRC Law rules for encounter in India
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और फिर हत्या मामले में अभियुक्त चार युवक पुलिस एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। कई संगठन इस एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस संबंध में खुद संज्ञान लिया है और तुरंत एक टीम को घटनास्थल पर जांच के लिए जाने के निर्देश दिए हैं। इस टीम का नेतृत्व एक एसएसपी करेंगे और जल्द ही आयोग को अपनी रिपोर्ट सौपेंगे।



इस एनकाउंटर की सच्चाई चाहे जो भी हो, लेकिन यह शब्द एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। लोगों के बीच चर्चा होने लगी है कि क्या एनकाउंटर के लिए किसी तरह के दिशा-निर्देश बनाए गए हैं? एनकाउंटर के बारे में क्या कहता है भारत का कानून? किसी अपराधी या आरोपी को पुलिस कब मार सकती है गोली? इन सवालों के जवाब आगे की स्लाइड्स में पढ़ें।

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पुलिस एनकाउंटर (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

भारतीय कानून में 'एनकाउंटर'

  • भारतीय संविधान के अंतर्गत 'एनकाउंटर' शब्द का कहीं जिक्र नहीं है। पुलिस की भाषा में इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब सुरक्षाबल/पुलिस और आरोपियों/अपराधियों के बीच हुई भिड़ंत में आरोपी या अपराधी की मौत हो जाती है।
  • भारतीय कानून में वैसे कहीं भी एनकाउंटर को वैध ठहराने का प्रावधान नहीं है। लेकिन कुछ ऐसे नियम-कानून जरूर हैं, जो पुलिस को यह ताकत देते हैं कि वो अपराधियों या आरोपियों पर हमला कर सकती है और उस दौरान अपराधी या आरोपी की मौत को सही ठहराया जा सकता है।

क्या और कहां हैं वो नियम/प्रावधान

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हैदराबाद पुलिस एनकाउंटर (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

आमतौर पर लगभग सभी तरह के एनकाउंटर में पुलिस आत्मरक्षा के दौरान हुई कार्रवाई का जिक्र ही करती है। आपराधिक संहिता यानी सीआरपीसी (CRPC) की धारा 46 कहती है कि अगर कोई अपराधी खुद को गिरफ्तार होने से बचाने की कोशिश करता है या पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश करता है या पुलिस पर हमला करता है तो इन हालातों में पुलिस उस अपराधी या आरोपी पर जवाबी हमला कर सकती है।

लेकिन... ये भी हैं नियम

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सांकेतिक तस्वीर

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश

मार्च 1997 में तत्कालीन एनएचआरसी के अध्यक्ष जस्टिस एमएन वेंकटचलैया ने सभी मुख्यमंत्रियों को एक पत्र लिखा था। उसमें पुलिस द्वारा फर्जी एनकाउंटर्स की शिकायतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने लिखा था, ''हमारे कानून में पुलिस को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी व्यक्ति को मार दे, और जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि उन्होंने कानून के अंतर्गत किसी को मारा है तब तक वह हत्या मानी जाएगी।''
जस्टिस वेंकटचलैया साल 1993-94 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। उन्होंने दो हालात बताए जिसमें जवाबी कार्रवाई में आरोपी या अपराधी की मौत को अपराध नहीं माना जा सकता।

क्या हैं वो दो हालात?

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महाराष्ट्र पुलिस (फाइल फोटो) - फोटो : Social media
  • पहला, अगर आत्मरक्षा की कोशिश में दूसरे व्यक्ति की मौत हो जाए।
  • दूसरा, सीआरपीसी की धारा 46 पुलिस को बल प्रयोग करने का अधिकार देती है। इस दौरान किसी ऐसे अपराधी को गिरफ्तार करने की कोशिश, जिसने वो अपराध किया हो जिसके लिए उसे मौत की सजा या आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है, वह पुलिस पर हमला कर भागने की कोशिश करे और इस कोशिश में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अपराधी या आरोपी की मौत हो जाए।
  • इसके अलावा एनएचआरसी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देशित किया कि वह पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत के लिए तय नियमों का पालन करे।

क्या हैं वो नियम?

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