{"_id":"602919908ebc3ee9276a1928","slug":"hyderabad-bowenpally-market-generates-electricity-from-waste-vegetables","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"वो मंडी जहां सब्जियों के कचरे से रोजाना तैयार होती है बिजली और जैविक खाद","category":{"title":"Education","title_hn":"शिक्षा","slug":"education"}}
वो मंडी जहां सब्जियों के कचरे से रोजाना तैयार होती है बिजली और जैविक खाद
सड़ी गली सब्जियों का हम क्या करते हैं फेंक देते हैं या गमलों में डाल देते हैं। लेकिन हैदराबाद की एक सब्जी मंडी जो रोज 10 टन कचरे से 500 यूनिट बिजली तैयार कर रही है। बोवनपल्ली मंडी में हर दिन लगभग 10 टन कचरा इकट्ठा होता है। पहले इसको फेंक दिया जाता था, लेकिन अब इसी जैविक कचरे से रोजाना लगभग 500 यूनिट बिजली तैयार हो रही है। रोजाना लगभग 500 यूनिट बिजली के अलावा इस जैविक वेस्ट से 30 किलोग्राम बायोगैस भी तैयार होती है।
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सड़ी-गली सब्जियां
बता दें कि ये 500 यूनिट बिजली 100 स्ट्रीट लाइट्स जलाने के अलावा मंडी में मौजूद 170 स्टॉल, एक एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग और पानी की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क के लिए काफी है। इसके अलावा जो 30 किलोग्राम बायोगैस बन रही है, उसे मंडी की कैंटीन में दिया जा रहा है, ताकि खाना पकाया जा सके।
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CSIR-IICT
हैदराबाद स्थित सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (IICT) के वैज्ञानिकों ने इस पर काम शुरू किया और अब इसका पेटेंट भी लिया जा चुका है। फिल्हाल IICT की ही देखरेख में एक इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ये काम कर रही है।
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सब्जियों के कचरे से तैयार होती बिजली
ऐसे तैयार होती है बिजली - सब्जियों के कचरे को पहले कन्वेयर बेल्ट पर रखा जाता है। ये कचरे को बारीक ढेर में बदल देता है जो एक तरह का घोल बन जाता है। इसके बाद घोल को बड़े कंटेनरों में डाल दिया जाता है, ताकि ये जैव ईंधन बन जाए। बता दें कि इस ईंधन में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन गैस होती है। ये ईंधन जेनरेटर में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे बिजली बनती है। वैज्ञानिक डॉ. ए.जी. राव के मुताबिक अब तक 1400 टन सब्जियों को बिजली में बदला जा चुका है। इससे 32 हजार यूनिट बिजली बनाई गई। साथ ही 700 किलोग्राम खाद भी तैयार हुई है।
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हैदराबाद की इस सब्जी मंडी के कचरे से बिजली और गैस बनाने को देखते हुए देश के कई हिस्सों में इसे शुरू करने की कवायद की जा रही है। साल 2021-22 के दौरान हैदराबाद की ही पांच दूसरी मंडियों में ये योजना शुरू की जाएगी। इनमें से एक एर्रागड्डा सब्जी मंडी में ये प्रक्रिया शुरू भी की जा चुकी है। इसके अलावा अब वैज्ञानिक कोशिश कर रहे हैं कि इसी जैव ऊर्जा को इस तरह से प्रोसेस किया जाए कि इससे वाहन भी चलाए जा सकें।
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