देश में वैश्विक संक्रामक महामारी कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रकोप से कोहराम मचा हुआ है। कोरोना महामारी प्रतिदिन लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले रही है और हजारों की जिंदगियां निगल रही है। लगातार तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों से देश की स्वास्थ्य प्रणाली चरमरा गई। अस्पतालों में बेड, वेंटिलेटर, जीवन रक्षक दवाओं और ऑक्सीजन की भारी किल्लत जारी है।
कोविड-19 : क्या है कोरोना की तीसरी लहर? क्या और कहर बरपाएगी महामारी? कैसे होगा बचाव? जानिए सबकुछ
Coronavirus in India: महामारी की लहर क्या है, इसका निर्धारण कैसे करते हैं, यह कब तक आएगी और कैसे बचा जा सकता है। आइए बताते हैं...
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एक महामारी में लहर क्या है?
महामारी में लहर क्या होती है, इसकी कोई किताबी परिभाषा नहीं है। विश्लेषक, लंबे समय तक संक्रमण के बढ़ते और घटते मामलों का वर्णन करने के लिए इस शब्द का सामान्य रूप से उपयोग करते हैं। ग्रोथ कर्व यानी विकास वक्र एक लहर के आकार जैसा दिखाई देता है। ऐतिहासिक रूप से, लहर शब्द का प्रयोग रोग की मौसम को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। प्रकृति में कई वायरल संक्रमण मौसमी होते हैं, और वे निश्चित समय अंतराल के बाद पुनरावृत्ति करते हैं।
संक्रमण बढ़ता है और फिर नीचे आता है, केवल कुछ समय बाद फिर से बढ़ने लगता है। इसी उतार-चढ़ाव को लहर कहा जाता है। भारत में महामारी की अब तक दो बड़ी लहरें देखी गई हैं लेकिन बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका में कोरोना संक्रमण की शुरुआती तीन लहरों ने काफी कहर बरपाया था, मगर वहां चौथी लहर के बाद मामलों में तेजी से गिरावट आई और अब पर्याप्त टीकाकरण के बाद अमेरिका को मास्क की पाबंदी से मुक्ति मिलने जा रही है। जबकि भारत में अभी इस महामारी की दूसरी लहर का खौफनाक प्रकोप देखने को मिल रहा है।
भारत में कोरोना की लहरें
कोविड -19 महामारी पिछले डेढ़ साल से लगातार जारी है, लेकिन हर भौगोलिक क्षेत्र यानी तकरीबन प्रत्येक देश में, मामलों में वृद्धि के ऐसे दौर आए हैं, जिसके बाद एक सापेक्षिक गिरावट भी आई है। भारत में अब तक दो अलग-अलग अवधि के उतार-चढ़ाव आए हैं, जिनके बीच में एक लंबे समय का अंतराल रहा। देश में 01 मार्च, 2020 के बाद कोरोना का प्रकोप शुरू हुआ था। 16 सितंबर, 2020 को पहली बार देश में 24 घंटे में 97,894 नए मामले सामने आए थे।
इसके बाद, मामलों में कमी आई लेकिन 06 मई, 2021 को 4,14,188 नए मामले सामने आए थे। इसके बाद फिर गिरावट आने लगी और 18 मई, 2021 को 2,67,334 नए संक्रमित ही सामने आए। बता दें कि देश में आधिकारिक तौर पर कोरोना संक्रमण के कुल मामले दो करोड़ 63 लाख के करीब पहुंच चुके हैं जबकि दो लाख 95 हजार से ज्यादा मौतें हुईं हैं। वहीं, अब दो करोड़ 30 लाख से अधिक मरीज स्वस्थ हुए हैं और 19 करोड 33 लाख से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है।
राज्यों में हालात अलग कैसे?
उदाहरण के लिए, किसी देश, राज्य या शहर के भीतर छोटे क्षेत्रों की अपनी लहरें हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली ने अब अप्रैल-मई 2021 तक चार लहरों का अनुभव किया है। वर्तमान लहर से पहले भी दिल्ली के कोरोना संक्रमण के प्रसार का ग्राफ देखने पर तीन अलग-अलग उच्च स्तर दिखाइे देते हैं, जिन्हें हम पीक लेवल यानी बड़ी लहर कह सकते हैं।
जबकि राजस्थान या मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में, फरवरी 2021 तक कोरोना संक्रमण के प्रसार का ग्राफ देखने पर में पता चलेगा कि वहां वर्तमान से पहले कोई विशेष बड़ी लहर नहीं दिखाई दी। हालांकि, छोटे स्तर पर सिर्फ दो लहरें सितंबर और नवंबर 2020 में देखी गई जब संक्रमण तेजी से बढ़ा था। लेकिन एक बड़ी गिरावट के बाद अप्रैल में एकदम से मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली। ऐसी स्थिति में अलग-अलग लहरों की पहचान करना मुश्किल है।
अगर, तीसरी लहर आई तो उसकी पहचान कैसे होगी?
वर्तमान में, तीसरी लहर सिर्फ विचाराधीन है। अर्थात, अगर राष्ट्रीय स्तर पर मामलों में एक बार फिर तेजी उछाल आता है तो उसे देश में कोरोना की तीसरी लहर माना जाएगा। लेकिन हाल ही में दोबारा उठाए गए आंशिक लॉकडाउन और सख्त कर्फ्यू जैसे कदमों के बाद अब सूरत थोड़ी बदलने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा लगता है कि राष्ट्रीय स्तर पर ग्राफ अब गिरावट के दौर में प्रवेश कर गया है।
देश में 06 मई को नए मामलों के चरम पर पहुंचने के बाद, पिछले दो हफ्तों में, दैनिक मामलों की संख्या 4.14 लाख के उच्च स्तर से गिरकर लगभग 2.6 लाख तक आ गई है। जबकि 37.45 लाख के उच्च स्तर को छूने के बाद सक्रिय मामले घटकर 32.25 लाख हो गए हैं। यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो यह उम्मीद की जाती है कि जुलाई तक, भारत फरवरी में मामलों की संख्या के समान स्तर पर पहुंच जाएगा। लेकिन, दुर्भाग्यवश अगर इसके उलट मामलों में बढ़ोतरी होती है और कुछ हफ्तों या महीनों तक जारी रहता है, तो उसे ही तीसरी लहर कहा जाएगा।
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