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क्या नागरिकता कानून 2019 को लागू करने से इनकार कर सकती हैं राज्य सरकारें?

Tue, 17 Dec 2019 11:24 AM IST
बीबीसी हिंदी Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Tue, 17 Dec 2019 11:24 AM IST
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Citizenship Amendment Act 2019 CAA CAB Can state govts deny implementation of new Citizenship act
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की तस्वीर - फोटो : PTI

देश की संसद से पारित होकर और राष्ट्रपति के मुहर के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक अब कानून की शक्ल ले चुका है। लेकिन एक तरफ जहां इसे लेकर पूर्वोत्तर राज्यों समेत दिल्ली में भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं कुछ राज्य सरकारें इसे अपने यहां लागू करने से ही इनकार कर रही हैं।





समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक पांच राज्यों के मुख्यमंत्री यह कह चुके हैं कि वे इसे अपने यहां लागू नहीं करेंगे। अपने राज्य में नागरिकता संशोधन कानून को लागू नहीं करने देने की बात करने वाले मुख्यमंत्रियों की इस सूची में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम भी जुड़ गया है। ममता बनर्जी ने कहा है कि वह किसी भी सूरत में इसे अपने राज्य में लागू नहीं होने देंगी। उन्होंने कहा, 'भारत एक प्रजातंत्रिक देश है और कोई भी पार्टी उसकी इस प्रकृति को बदल नहीं सकती। हमारे राज्य में किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है। कोई भी आपको बाहर नहीं निकाल सकता है। कोई भी इस कानून को मेरे राज्य में लागू नहीं कर सकता।'

कौन-कौन से राज्य इस कानून के खिलाफ?

Citizenship Amendment Act 2019 CAA CAB Can state govts deny implementation of new Citizenship act
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की तस्वीर - फोटो : PTI
  • ममता से पहले भी दो राज्यों पंजाब और केरल ने कहा कि वो इस संशोधन विधेयक को अपने यहां लागू नहीं करेंगे। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट किया, 'कोई भी कानून जो लोगों को धर्म के आधार पर बांटता हो, असंवैधानिक और अनैतिक हो वो गैरकानूनी है। भारत की ताकत इसकी विविधता में है और नागरिकता संशोधन कानून इसके आधारभूत सिद्धान्तों का उल्लंघन करता है। लिहाजा, मेरी सरकार इसे पंजाब में नहीं लागू होने देगी।'
  • इसके अलावा जिन दो अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस पर बयान दिया है, वो हैं छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि वो इस कानून पर कांग्रेस पार्टी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

क्या राज्य सरकारें ऐसा कर सकती हैं?

Citizenship Amendment Act 2019 CAA CAB Can state govts deny implementation of new Citizenship act
नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करते विद्यार्थी - फोटो : PTI
  • अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या राज्य सरकारें नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने से इनकार कर सकती हैं? संविधान क्या कहता है? विरोध करने वालों के पास क्या विकल्प हैं?
  • नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के स्वर अब तक गैर भाजपा शासित राज्यों से ही उठे हैं। देश के 29 राज्यों में से इस वक्त 16 में भारतीय जनता पार्टी या उसके सहयोगियों की सरकारें हैं। 
  • यानी 13 राज्यों में बीजेपी या उसकी सहयोगी पार्टी की सरकारें नहीं है। तो क्या ये राज्य अगर चाहें तो नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने से इनकार कर सकते हैं?

क्या कहते हैं संविधान के जानकार?

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Citizenship Amendment Act 2019 CAA CAB Can state govts deny implementation of new Citizenship act
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन - फोटो : Twitter
  • संविधान विशेषज्ञ चंचल कुमार कहते हैं कि 'राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पर अपनी मुहर लगाकर इसे अधिनियम (कानून) बनाया है। 
  • आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही यह कानून लागू भी हो गया है। अब चूंकि यह कानून संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत संघ की सूची में आता है। तो यह संशोधन सभी राज्यों पर लागू होता है और राज्य चाहकर भी इस पर कुछ ज्यादा नहीं कर सकते।'
  • वो बताते हैं, 'संविधान की सातवीं अनुसूची राज्यों और केंद्र के अधिकारों का वर्णन करती है। इसमें तीन सूचियां हैं- संघ, राज्य और समवर्ती सूची। नागरिकता संघ सूची के तहत आता है। लिहाजा इसे लेकर राज्य सरकारों के पास कोई अधिकार नहीं है।'
  • यही केंद्र सरकार का भी कहना है कि राज्यों के पास ऐसा कोई भी अधिकार नहीं है कि वह केंद्र की सूची में आने वाले विषय 'नागरिकता' से जुड़ा कोई अपना फैसला कर सकें।
  • गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक केंद्रीय सूची में आने वाले विषयों के तहत बने कानून को लागू करने से राज्य इनकार नहीं कर सकते।

तो.. विरोध करने वालों के पास क्या हैं विकल्प?

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Citizenship Amendment Act 2019 CAA CAB Can state govts deny implementation of new Citizenship act
नागरिकता संशोधन कानून का विरोध (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • अगर राज्य सरकारें इस कानून के खिलाफ नहीं जा सकतीं तो फिर इस पर विरोध करने वालों के सामने क्या विकल्प हैं? क्या इस कानून को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?
  • चंचल कुमार कहते हैं कि 'कोई राज्य सरकार, संस्था या ट्रस्ट इस कानून पर सवाल नहीं उठा सकते। मसला नागरिकता का है और नागरिकता किसी व्यक्ति विशेष को दी जाती है। लिहाजा वही इसके खिलाफ आवाज उठा सकता है। इसे चुनौती देने के लिए कोर्ट की शरण में जा सकता है।'
  • कानूनी मामलों के जानकार फैजान मुस्तफा ने बीबीसी को बताया कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत राज्य नागरिकों और गैर-नागरिकों, दोनों को ही कानून के तहत समान संरक्षण देने से इनकार नहीं करेगा। संविधान धर्म के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव और वर्गीकरण को गैर कानूनी समझता है।'

ये भी पढ़ें : Citizenship Amendment Act: नागरिकता मामले पर सदन में क्यों हुआ पाकिस्तान के कानून मंत्री का जिक्र

क्या है नागरिकता संशोधन कानून? किन राज्यों में यह लागू नहीं होगा?

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