शिक्षक एक मोमबत्ती की तरह होते हैं, जो खुद जल कर भी दूसरों के जीवन को रोशनी देते हैं। ऐसे ही एक महान शिक्षक हैं भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जिनके सम्मान में 5 सितंबर को देश में शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
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Teachers Day: सर्वपल्ली राधाकृष्णन की ये पांच बातें अपनाकर आप हो सकते हैं सफल
amarujala.com- Presented by: अपूर्वा राय
Updated Tue, 05 Sep 2017 11:15 AM IST
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'अच्छा टीचर वो है, जो ताउम्र सीखता रहता है और अपने छात्रों से सीखने में भी कोई परहेज नहीं दिखाता।'
सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपने विचारों को खुद के जीवन में भी लागू करते थे। जहां उन्हें कुछ सीखने को मिलता बस वहीं सीखने बैठ जाते। उनका मानना था जीवन में सीखने के लिए इतना कुछ है कि सारी उम्र निकल जाए।
सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपने विचारों को खुद के जीवन में भी लागू करते थे। जहां उन्हें कुछ सीखने को मिलता बस वहीं सीखने बैठ जाते। उनका मानना था जीवन में सीखने के लिए इतना कुछ है कि सारी उम्र निकल जाए।
'शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें।'
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन कहते थे मात्र जानकारियां देना शिक्षा नहीं है। शिक्षा का लक्ष्य है ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना और निरन्तर सीखते रहने की प्रवृत्ति।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन कहते थे मात्र जानकारियां देना शिक्षा नहीं है। शिक्षा का लक्ष्य है ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना और निरन्तर सीखते रहने की प्रवृत्ति।
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'दुनिया के सारे संगठन अप्रभावी हो जाएंगे यदि यह सत्य कि ज्ञान अज्ञान से शक्तिशाली होता है उन्हें प्रेरित नहीं करता।'
अगर आपके शिक्षक आपको ये नहीं बताते कि जीवन में सच की राह पर चलकर ही मकाम हासिल किया जा सकता है। तो सोचिए आप आज कहां होते।
अगर आपके शिक्षक आपको ये नहीं बताते कि जीवन में सच की राह पर चलकर ही मकाम हासिल किया जा सकता है। तो सोचिए आप आज कहां होते।
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'किताबें पढ़ने से हमें एकांत में विचार करने की आदत और सच्ची खुशी मिलती है।'
किताबों से अच्छा कोई दोस्त नहीं होता। इस बात को डॉ. राधाकृष्णन बखूबी जानते थे। इसलिए वो चाहते थे कि छात्र ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ें। किताब पढ़ने से छात्र अपना नजरिया विकसित कर पाते हैं।
किताबों से अच्छा कोई दोस्त नहीं होता। इस बात को डॉ. राधाकृष्णन बखूबी जानते थे। इसलिए वो चाहते थे कि छात्र ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ें। किताब पढ़ने से छात्र अपना नजरिया विकसित कर पाते हैं।
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