वर्तमान समय में मेडिकल के क्षेत्र में आए दिन कोई न कोई आधुनिक तकनीक एवं उपकरणों का प्रयोग हो रहा है। ऐसे में समय रहते जटिल प्रक्रियाओं को सुलझा लेने में आसानी होती है। हालांकि, इन उपकरणों को संचालित करने से पहले उनकी अच्छी तरह से जांच करना, मानव शरीर के क्रियाकलापों और इन उपकरणों का प्रभाव समझना आसान काम नहीं है। ऐसे में इंजीनियरिंग की एक अलग शाखा, इन चीजों पर ध्यान केंद्रित करती है। इस शाखा को ही 'बायोमेडिकल इंजीनियरिंग' (बीएमई) कहते हैं। इससे संबंधित कार्यों को अंजाम देने वाले प्रोफेशनल्स को ही बायोमेडिकल इंजीनियर कहते हैं। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग का क्षेत्र उन लोगों के लिए है, जो मेडिसिन एवं हेल्थकेयर में रुचि रखते हैं।
बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में बनाएं करियर, नहीं होगी नौकरियों की कमी
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क्या है बायोमेडिकल इंजीनियरिंग
तकनीकी भाषा में कहें, तो बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग की एक ऐसी शाखा है, जिसमें मेडिकल एप्लिकेशंस, विभिन्न इलाजों या डायग्नोस्टिक टेक्नोलॉजी के विकास और रिसर्च के लिए इंजीनियरिंग सिद्धातों की मदद ली जाती है। बायोमेडिकल इंजीनियर का कार्य मेडिकल संबंधी उपकरणों की देखभाल और उनके सही तरह से कार्य करने संबंधी होता है। बीएमई एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें विशेषज्ञ इंजीनियरिंग एवं लाइफ साइंस के सिद्धांतों को प्रयोग में लाते हैं।
कई शाखाएं हैं इसकी
बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में कई सब-कैटेगरी होती हैं, जिनमें से किसी एक में विशेषज्ञता प्राप्त कर सकते हैं। इनमें बायोइंस्ट्रूमेंटेशन, बायोमटीरियल्स, सेल्यूलर, टिशू एंड जेनेटिक इंजीनियरिंग, क्लीनिकल इंजीनियरिंग, मेडिकल इमेजिंग, ऑर्थोपेडिक बायोइंजीनियरिंग, रिहैबिलिटेशन इंजीनियरिंग आदि शामिल हैं।
कार्य में क्या शामिल
बायोमेडिकल इंजीनियर को मेडिकल डिवाइस पर रिसर्च करने, टेस्टिंग और मूल्यांकन संबंधी कार्य करना होता है। अस्पतालों और मेडिकल सेंटर्स के लिए नए बायोमेडिकल सामानों की खरीदारी भी करनी पड़ती है। बायोमेडिकल इंजीनियर्स मेडिकल डिवाइसेज, स्पोर्ट्स मेडिसिन, स्टेम सेल रिसर्च, बायोमार्कर्स, जीनोमिक्स, नैनोटेक्नोलॉजी आदि क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त करके कार्य कर सकते हैं। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग संबंधी प्रोजेक्ट्स में कृत्रिम अंग और प्रोस्थेटिक लिंब्स, कंप्यूटर की सहायता से होने वाली मेडिकल संबंधी क्रियाएं और इलाज, सूचना विज्ञान और मेडिकल इमेजिंग शामिल होते हैं।
शैक्षणिक योग्यता
इससे संबंधित कोर्स करने के लिए छात्र को साइंस स्ट्रीम में 10+2 होना जरूरी है। बायोमेडिकल इंजीनियर्स को इंजीयरिंग, भौतिकी, रसायन या जीव विज्ञान में स्नातक की डिग्री चाहिए होती है। ज्यादातर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग संबंधी नौकरी के लिए बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री की आवश्यकता होती है। आजकल कुछ संस्थानों ने बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में स्नातक स्तर का बीटेक पाठ्यक्रम भी शुरू किया है। इसमें कि्लनिकल संबंधी कोर्स भी करना पड़ता है। मेडिकल क्षेत्र में रिसर्च करना चाहते हैं, तो बायोमडिकल में एमफिल या पीएचडी कर सकते हैं।
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