सरकारी स्कूलों में ये खाने को मजबूर किए जा रहे बच्चे, कोई नहीं सवाल उठाने वाला
प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील में मिलने वाला भोजन रास नहीं आ रहा है। इसका ताजा उदाहरण सोमवार को अजरौंदा स्थित प्राथमिक पाठशाला में देखने को मिला। दिन में करीब 12 बजे मिड डे मील का वाहन स्कूल पहुंचा। बच्चों को लाइन में लगाकर प्लेटों में चने के साथ चावल परोसे गए, लेकिन अधिकांश ने चखना भी मुनासिब नहीं समझा। खाना देखकर बच्चे मुंह सिकोड़ते नजर आए।
सोमवार को चना-चावल, मंगलवार को मीठा दलिया, बुधवार को खिचड़ी, बृहस्पतिवार को दाल-रोटी, शुक्रवार को पुलाव एवं शनिवार को कढ़ी चावल का वितरण किया जाता है। इसमें चावल की मात्रा अधिक होने के कारण बच्चे मिड डे मील से दूर भाग रहे हैं। वहीं,दलिया भी बच्चे पसंद नहीं कर रहे हैं।
यह है नियम
कक्षा एक से पांच तक 4.13 रुपये एवं कक्षा छह से आठ में 6.18 रुपये की राशि मिड डे मील के लिए प्रत्येक बच्चे के लिए निर्धारित है। प्राथमिक के छात्रों को 450 ग्राम कैलोरी एवं 12 ग्राम प्रोटीन तथा अपर प्राथमिक में 700 ग्राम कैलोरी एवं 20 ग्राम प्रोटीन दिया जाना निर्धारित है। वर्तमान में बच्चे जो खाना पसंद ही नहीं कर रहे। ऐसे में पौष्टिकता हो या न हो, क्या फर्क पड़ता है।