दिल्ली में तीनों नगर निगमों के नतीजों ने आम आदमी पार्टी को न सिर्फ चौंका दिया है बल्कि खतरे की घंटी बजा दी है। परिणाम आने से पहले ही पार्टी के बड़े नेता भगवंत मान ने पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी नेतृत्व ने ऐतिहासिक भूल की है।
इससे पहले दिल्ली के राजौरी गार्डन में उपचुनाव के नतीजा आम आदमी पार्टी के न सिर्फ खिलाफ गया बल्कि वह तीसरे नंबर पर पहुंच गई। इस सीट को बीजेपी के मनजिंदर सिरसा ने भारी मतों से जीत लिया।
दो साल पहले दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक सफलता दर्ज करते हुए 70 में से 67 सीटें जीत ली थीं। लेकिन इतने कम समय में ही पार्टी की इतनी बुरी हालत के लिए इन दस कारणों को जिम्मेदार माना जा सकता है।
1. जरनैल सिंह को पंजाब भेजना- राजौरी गार्डन सीट से 2015 में आप के जरनैल सिंह विधायक चुन कर आए थे। लेकिन पंजाब चुनाव आते ही उन्हें इस सीट से इस्तीफा दिलाकर पंजाब ले जाया गया जो दिल्ली के लोगों को पसंद नहीं आया। क्योंकि एक तो उन्हें दोबारा चुनाव में धकेल दिया गया वहीं इस दौरान आम आदमी पार्टी को पंजाब में भी करारी हार का सामना करना पड़ा। पंजाब में हारने के बावजूद भी जरनैल सिंह को आप ने दोबारा राजौरी गार्डन से टिकट देने के बजाय हरजीत सिंह को चुनाव में उतारा जो वहां जनता को पसंद नहीं आया।
2. शुंगलू कमिटी की रिपोर्ट से आप की किरकिरी- एमसीडी चुनाव और उपचुनाव से ठीक पहले शुंगलू कमिटी की रिपोर्ट का बाहर आना आम आदमी पार्टी के लिए डूबते जहाज में छेद की तरह साबित हुआ। शुंगलू कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ-साफ कह दिया है कि आप ने पिछले दो साल में सिर्फ अपनी मनमानी की है। उन्हें किसी भी मामले में एलजी की सहमति नहीं ली और किसी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
3. 16000 की थाली ने डुबोई आप की लुटिया- चुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए आम आदमी पार्टी की एक सलाना जलसे का एक ऐसा बिल जनता के सामने रख दिया जिसने आम आदमी पार्टी की छवि पर ही सवालिया निशान खड़ा कर दिया। इस बिल में दिखाया गया है कि इस जलसे में मेहमानों के लिए मंगाई गई एक-एक थाली की कीमत लगभग 12 से 16 हजार रुपए थी। जनता के धन पर सरकार की ऐश लोगों को पसंद नहीं आई और यह भी पार्टी के खिलाफ गया।
4. विज्ञापन पर खर्च दिए 97 करोड़- आम आदमी पार्टी पर लगातार यह आरोप लगता रहा है कि उसने दिल्ली की जनता की गाढ़ी कमाई की बड़ी मात्रा अपने सरकार के विज्ञापन पर खर्च कर दिए। आम आदमी पार्टी ने पिछले दो साल में सरकारी खजाने के 97 करोड़ रुपए अखबार, टीवी और विभिन्न माध्यमों पर विज्ञापन देने में ही खर्च कर दिए। निश्चित ही दिल्ली की जनता को यह बात पसंद नहीं आई कि जिन पैसों को शहर के विकास के लिए खर्च करना था वो पार्टी के एड पर खर्च हुए।