देहरादून के दून महिला अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद उसकी छह साल की मासूम बेटी शव को देखते ही फफककर रो पड़ी। मौके पर मौजूद कुछ महिलाओं ने उसे जैसे-तैसे संभाला। वहीं पति रमेश भी पत्नी की मौत के बाद बिलख पड़ा।
मूलत: टिहरी गढ़वाल निवासी रमेश मसूरी में काम कर परिवार का पालन पोषण करता है। लंबे समय से बीमार पत्नी के इलाज में काफी पैसा भी खर्च कर चुका है, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी वह उसे बचा नहीं पाया।
राजधानी के दून महिला अस्पताल में बेड के इंतजार में पांच दिन से बरामदे में पड़ी एक गर्भवती महिला ने बृहस्पतिवार को फर्श पर ही बच्चे को जन्म देने के बाद दम तोड़ दिया। मां की मौत के कुछ क्षण के भीतर नवजात ने भी मौके पर दम तोड़ दिया।
जच्चा-बच्चा की मौत से बिफरे परिजनों और अन्य लोगों ने अस्पताल में जमकर हंगामा काटा। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह परिजनों को समझा-बुझाकर स्थिति को संभाला। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों और नर्सों की लापरवाही से महिला और नवजात की मौत हुई। अस्पताल प्रबंधन आरोपों को गलत बता रहा है। मेडिकल कालेज प्राचार्य ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है।
शुचिता रावत को प्रसव पीड़ा होने पर 15 सितंबर को दून महिला अस्पताल में लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि उसे भर्ती तो कर लिया गया, मगर डॉक्टरों ने अस्पताल में बहुत अधिक मरीज भर्ती होने का हवाला देते हुए शुचिता को बेड देने से इंकार कर दिया था। ऐसे में शुचिता तब से अस्पताल के बरामदे में लेटी हुई थी। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उसे बेड दिया गया था।