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फर्श पर डिलीवरी: मां और नवजात भाई का शव जमीन पर पड़ा देख बिलख पड़ी छह साल की मासूम

Fri, 21 Sep 2018 08:05 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 21 Sep 2018 08:05 AM IST
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Women delivery on hospital floor girl crying to see newborn and mother dead body
doon female hospital

देहरादून के दून महिला अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद उसकी छह साल की मासूम बेटी शव को देखते ही फफककर रो पड़ी। मौके पर मौजूद कुछ महिलाओं ने उसे जैसे-तैसे संभाला। वहीं पति रमेश भी पत्नी की मौत के बाद बिलख पड़ा। 

Women delivery on hospital floor girl crying to see newborn and mother dead body
doon female hospital

मूलत: टिहरी गढ़वाल निवासी रमेश मसूरी में काम कर परिवार का पालन पोषण करता है। लंबे समय से बीमार पत्नी के इलाज में काफी पैसा भी खर्च कर चुका है, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी वह उसे बचा नहीं पाया।

Women delivery on hospital floor girl crying to see newborn and mother dead body
doon female hospital

राजधानी के दून महिला अस्पताल में बेड के इंतजार में पांच दिन से बरामदे में पड़ी एक गर्भवती महिला ने बृहस्पतिवार को फर्श पर ही बच्चे को जन्म देने के बाद दम तोड़ दिया। मां की मौत के कुछ क्षण के भीतर नवजात ने भी मौके पर दम तोड़ दिया। 

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Women delivery on hospital floor girl crying to see newborn and mother dead body
doon female hospital

जच्चा-बच्चा की मौत से बिफरे परिजनों और अन्य लोगों ने अस्पताल में जमकर हंगामा काटा। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह परिजनों को समझा-बुझाकर स्थिति को संभाला। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों और नर्सों की लापरवाही से महिला और नवजात की मौत हुई। अस्पताल प्रबंधन आरोपों को गलत बता रहा है। मेडिकल कालेज प्राचार्य ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है।
 

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Women delivery on hospital floor girl crying to see newborn and mother dead body
doon female hospital

शुचिता रावत को प्रसव पीड़ा होने पर 15 सितंबर को दून महिला अस्पताल में लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि उसे भर्ती तो कर लिया गया, मगर डॉक्टरों ने अस्पताल में बहुत अधिक मरीज भर्ती होने का हवाला देते हुए शुचिता को बेड देने से इंकार कर दिया था। ऐसे में शुचिता तब से अस्पताल के बरामदे में लेटी हुई थी। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उसे बेड दिया गया था। 

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