पांच सौ और हजार रुपये के नोट क्या बंद हुए घर की होम मिनिस्टरी की पतियों के सामने पोल खुल गई। कहीं चावल के डिब्बे से हजार रुपये निकले तो किसी ने 500 सौ के नोट दाल के डिब्बे से निकाले। कुछ महिलाओं ने थोड़ी सी चालाकी दिखाई और भाई, बेटों और भतीजों से 10 तारीख को बैंक खुलने पर चलने की सेटिंग की।
चावल और दाल के डिब्बे से निकले 500 और 1000 के नोट
दीदी, मम्मी और चाची को ऐसी मुसीबत में फंसा देख इन लोगों ने भी तगड़े कमीशन की डिमांड कर दी। यह कहानी किसी एक घर की नहीं बल्कि हर घर की रहीं, जहां गृहलक्ष्मियों ने पतियों से छिपाकर जरूरत के लिए कुछ रकम बचा रखी है।
दरअसल पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने के बाद सबसे अधिक चिंता महिलाओं को हुई। पति से घर खर्च के नाम पर मिले बजट से चोरी छुपी सेविंग करने वाली महिलाओं को यह डर सताने लगा कि अब उनकी जमापूंजी की पोल पट्टी पति के सामने खुल जाएगी और वह रकम बैंक में चली जाएगी और बाद में जरूरत के नाम पर पति खर्च कर देंगे।
रात में प्रधानमंत्री के 500 और हजार के नोट बंद करने की घोषणा के बाद हर पति ने अपनी पत्नी से पूछा कि हजार, पांच सौ के नोट रखे हो तो बता दो, पर किसी ने जुबान नहीं खोली पर जैसे ही सबेरा हुआ पति से धीरे से कहा गया कि ‘सुनो जी, अरे सुनते हो’ मेरे पास कुछ पैसे रखे हैं, पति ने पूछा कितने? हर घर से अलग-अलग जवाब आया।
पति भी पत्नी का मुंह देखते रहे बाद में कहा ‘ठीक है लाओ बैंक खुलते ही जमा करके आता हूं। महीनों की बचत कुछ पल में ही हाथ से चली जाने से हर पत्नी इस फैसले से नाराज नजर आई। कुछ महिलाएं चालक निकलीं उन्होंने भाई, बेटों और भतीजों से कहा कि 10 तारीख को बैंक चलोगे, बताना नहीं 500 रुपये दूंगी। 500 की बात पर भाई, बेटों और भतीजों के कान खड़े हो गए। उन्होंने फौरन शातिराना अंदाज में ज्यादा पैसे की डिमांड कर दी। यह कहानी हर घर की रही।