सिलक्यारा की जिस सुरंग में 14 दिन से मजदूर फंसे हैं, उसके प्रवेश द्वार पर रिस रहे पानी ने सबकी चिंताएं बढ़ा दीं। शनिवार को पानी टपकने लगा। हालांकि, अधिकारी इसे सामान्य घटना मान रहे हैं।
सुरंग के मुहाने पर शनिवार को सुबह अचानक पानी का रिसाव तेज हो गया। पहले दो जगह से रिसाव हुआ और इसके बाद रिसाव बढ़ गया। देखते ही देखते कई जगहों से रिसाव शुरू हो गया। बाबा बौखनाग के मंदिर के पीछे भी रिसाव होने लगा। शनिवार को यहां आए लोगों के बीच इस पानी को लेकर कौतुहल व चिंताएं नजर आईं।
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यहां से हो रहा पानी का रिसाव
- फोटो : अमर उजाला
सुरंग के ऊपर से लगातार पानी टपक रहा था। अधिकारियों का कहना है कि यह सामान्य घटना है। पेड़ की जड़ों के नीचे से पानी किसी स्रोत से आ जाता है। सभी कामना कर रहे हैं कि इस रिसाव से कोई परेशानी न बढ़े।
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बाबा बौखनाग की डोली
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14 दिन से गंगा-यमुना घाटी के ईष्ट आराध्य देवताओं को मनाने के लिए स्थानीय लोग अपने-अपने देवता की शरण में हैं। सुबह-शाम उनकी सलामती और ऑपरेशन सिलक्यारा के सफल होने की कामना की जा रही है।
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सुरंग में मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश जारी।
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वहीं, मजदूरों को बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर चल रहा अभियान फिलहाल थम गया है। ड्रिल करने वाली अमेरिकन ऑगर मशीन अवरोध की जद में आने से टूट गई। उसका 45 मीटर हिस्सा 800 मिमी पाइप के भीतर फंस गया।
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बचाव अभियान का जायजा लेते सीएम धामी
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उधर, आज शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रभारी मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल और मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु भी निरीक्षण करने पहुंचे। इसके बाद उन्होंने बैठक की, जिसमें पीएमओ के भी अधिकारी शामिल हुए।