भगवान बागनाथ की पौराणिक नगरी में मंगलवार से उत्तराखंड के कुमाऊं का सुप्रसिद्ध उत्तरायणी मेला शुरू हो गया है। शुभारंभ के अवसर पर शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। रंगोली पिछौड़ा ओढ़कर महिलाएं कलश यात्रा में शामिल हुईं। जुलूस में कुमाऊं, गढ़वाल की लोक संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले। वहीं राजस्थानी, पंजाबी, शौका, जौनसारी समेत विभिन्न संस्कृति की छटा भी दिखाई दी।
तहसील परिसर में विधायक चंदन राम दास, पालिकाध्यक्ष सुरेश खेतवाल, डीएम रंजना राजगुरु ने शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसमें शामिल लोग तहसील रोड, गोमती पुल, स्टेशन रोड, माल रोड, सरयू पुल, जिला अस्पताल रोड, दुग बाजार होकर मुख्य मेला स्थल नुमाइशखेत पहुंचे। जुलूस में सबसे आगे नायब सूबेदार मंगल सिंह के नेतृत्व में कुमाऊं रेजीमेंट का बैंडवादक दल चल रहा था।
जुलूस में सैनिक हाईस्कूल, जिम कॉर्बेट इंटरनेशनल स्कूल, गायत्री विद्या मंदिर जूनियर हाईस्कूल, प्राथमिक विद्यालय पालनीकोट, हिमालयन सेंट्रल स्कूल, जीआईसी, जीजीआईसी, विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, कंट्रीवाइड पब्लिक स्कूल, न्यू जूनियर हाईस्कूल, आनंदी एकेडमी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्कूल, प्राथमिक विद्यालय पालनीकोट के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्राथमिक विद्यालय पालनीकोट के बच्चे भगवान शिव, काली मां आदि देवी, देवताओं की वेशभूषा में सजे थे।
मंगलवार को शहर में निकला भव्य सांस्कृतिक जुलूस में शामिल झांकियां आकर्षण का केंद्र रही। झांकी देखने के लिए घरों की छतों, दुकानों के आगे लोगों की भीड़ जमा हो गई है। कई लोगों ने घरों की खिड़कियों से भी झांकियों का दीदार किया।
जुलूस में कुमाऊंक ढोल, दमाऊ, नगाड़, बीनबाज, तुतुरी, रमसिंगा चार चांद लगाई। कुमाऊं रेजीमेंटक बैंड की मधुर धुन सुन बेर भल लागो। छोलिया नर्तकों ने भी शानदार प्रस्तुति से लोगों का मन मोहा। धारचूला से आए नगाड़े की धुन भी सुनाई दी।