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दिल में गुस्सा और आंखों में आंसू, शहीद के पिता बोले, 'बेटे की शहादत पर गर्व है मुझे, तस्वीरें...

Sun, 17 Feb 2019 09:41 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खटीमा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खटीमा Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 17 Feb 2019 09:41 AM IST
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Uttarakhand martyr soldier father emotional talk after pulwama terror attack
शहीद वीरेंद्र सिंह

पुलवामा में आत्मघाती हमले में शहीद विरेंद्र सिंह के पिता दीवान सिंह को बेटे की शहादत पर गर्व है। बेटे को याद करते-करते उनकी आंखें कभी डबडबा कर छलक पड़तीं तो कभी भिंचे ओठ पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश दर्शाते हैं। 

Uttarakhand martyr soldier father emotional talk after pulwama terror attack
शहीद वीरेंद्र सिंह (फाइल फोटो)

आतंकियों की कायराना हरकत पर दीवान सिंह ने कहा कि ‘आतंकी देशन से त बदलो लेना चाहिए। मेरा देश इन हमलों का बदला जरूर लेएगो।’ शहीद के बड़े भाई जयराम सिंह और राजेंद्र भाई की शहादत से सदमे में हैं।

Uttarakhand martyr soldier father emotional talk after pulwama terror attack
martyr

सीआरपीएफ के जवान विरेंद्र की शहादत की खबर जिसे भी मिली, वह उनके घर की ओर चल पड़ा। विरेंद्र की बेसुध पत्नी रेनू और अन्य परिजनों को ढाढ़स बधाते हुए हर एक आंख नम हो गईं। सभी की जुबां पर सिर्फ यही बात थी कि आखिर कब तक हमारे बच्चों का खून इसी तरह बहता रहेगा। आखिर कब आतंकियों, उनके आकाओं को माकूल जवाब मिलेगा। थरूवाटी भाषा में महिलाएं यही कहती दिखीं कि ‘नाश जाय, पाक को नाश कैसे होवेगो।’  

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martyr

पुलवामा में हुए फिदायीन हमले में खटीमा के मोहम्मदपुर भुड़िया निवासी विरेंद्र सिंह राणा (36) क्षेत्र के मोहम्मदपुर भुड़िया निवासी दीवान सिंह (80) के पांच बेटों और बेटियों में सबसे छोटे थे। उनकी माता सावित्री देवी का सात वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। बड़े भाई जयराम सिंह वर्ष 2017 में बीएसएफ से सेवानिवृत्त हैं, जबकि मझले भाई राजेंद्र सिंह खेती करते हैं। 

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पिता दीवान सिंह विरेंद्र के परिवार के साथ ही रहते थे। विरेंद्र सिंह वर्ष 2004 में रामपुर से सीआरपीएफ बटालियन 45 में भर्ती हुए। एक वर्ष पहले ही उनकी पोस्टिंग कश्मीर में हुई थी। वह बीती 23 जनवरी को छुट्टी पर घर आए थे और दो दिन पहले (12 फरवरी) ही ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे। तब किसी को क्या पता था कि विरेंद्र को सभी आखिरी बार देख रहे हैं। 

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