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चमोली जल प्रलयः वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के शोध में सामने आई आपदा से जुड़ी ये बड़ी बातें 

Wed, 10 Feb 2021 01:07 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरविंद सिंह , अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह , अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 10 Feb 2021 01:07 PM IST
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Uttarakhand Glacier Burst Chamoli News: big facts of chamoli glacier disaster
चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला
नदी देवी पर्वत पर 13000 फीट की ऊंचाई पर हुए भूस्खलन के बाद भारी चट्टानों के टूटने, लाखों टन बर्फ के खिसकने और फिर चट्टानों व बर्फ दबाव से नीचे हैंगिंग ग्लेशियर टूटने को चमोली में आई आपदा का कारण माना जा रहा है।

 

 

Uttarakhand Glacier Burst Chamoli News: big facts of chamoli glacier disaster
चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी की दो टीमों के शोध में प्रथम दृष्टया यह बात सामने आई है। वैज्ञानिकों की टीमें 13000 फीट की ऊंचाई पर आपदा के उद्गम स्थल तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
 

Uttarakhand Glacier Burst Chamoli News: big facts of chamoli glacier disaster
चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके राय ने बताया कि संस्थान के वैज्ञानिकों की दो टीमें आपदा से जुड़े तमाम पहलुओं को लेकर शोध में जुट गई हैं। प्रथम दृष्टया यह बात सामने आई है कि ऊपरी क्षेत्रों में भूस्खलन व भारी मात्रा में बर्फ के खिसकने के चलते ग्लेशियर का वह हिस्सा भी टूट गया जो पहले से ही लटका हुआ था।

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Uttarakhand Glacier Burst Chamoli News: big facts of chamoli glacier disaster
चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला

भारी मात्रा में बोल्डर, मिट्टी व बर्फ होने की वजह से भयावह आपदा आई और भारी नुकसान हुआ। संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम एरियल सर्वे करने के साथ ही उन स्थानों पर भी जाने की कोशिश कर रही हैं, जहां से आपदा की शुरुआत हुई।

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Uttarakhand Glacier Burst Chamoli News: big facts of chamoli glacier disaster
चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला

उम्मीद है कि संस्थान के वैज्ञानिकों की टीमें गुरुवार सुबह तक वहां पहुंच जाएंगी। इसके बाद ही असल वजह का पता चल सकेगा। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों के शोध में यह भी सामने आई है कि भारी मात्रा में मबला नीचे आया, जिसके चलते ऋषिगंगा नदी का प्रवाह थोड़ी देर के लिए रुक गया था। लेकिन बाद में ऊपरी हिस्से से आए और मलबे ने इस बाधा को तोड़ दिया और फिर नीचे भारी तबाही हुई। 

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