उत्तराखंड के चमोली में आई आपदा के दौरान एसडीआएफ, एनडीआरएफ और आईटीबीपी के जवानों ने 40 जिंदगियों को बचाया। विपरीत परिस्थितियों में जवानों ने हौसला दिखाते हुए जब लोगों को मलबे से बाहर निकाला तो उनके चेहरे की खुशी देखने लायक थी। तस्वीरें देखिए...
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चमोली आपदा में बचाव कार्य करते जवान
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि आपदा में कम से कम 125 लोगों के लापता होने की जानकारी है। सात शव बरामद कर लिए गए हैं। करीब 40 लोगों को बचा भी लिया गया है। बचाव और राहत कार्य सरकार की पहली प्राथमिकता है, इसमें पूरी क्षमता से काम किया जा रहा है।
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चमोली आपदा में व्यक्ति को बचाते जवान
- फोटो : अमर उजाला
रविवार देर शाम आपदा कंट्रोल रूम का निरीक्षण करने के बाद मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि यह हिमस्खलन है या कोई झील टूटी है, इसका अभी पता नहीं चल पाया है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार इतना जरूर कह सकती है कि राहत और बचाव के लिए सभी कुछ मौजूद है।
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चमोली आपदा में व्यक्ति को बचाते जवान
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नीति घाटी में रेणी गांव के पास ऋषि गंगा में अचानक पानी और मलबा आने की जानकारी मिली थी। यहां पर दो जल विद्युत परियोजनाएं हैं और दोनों को ही नुकसान हुआ है। करीब 13 मेगावाट की एक परियोजना में 35-36 लोग काम करते थे। इसी परियोजना से पांच किलोमीटर की दूरी पर निर्माणाधीन एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना में करीब 176 श्रमिक कार्यरत थे, उनका रिकॉर्ड गायब हो गया है।
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तपोवन टनल तक जाने के लिए नीचे उतरते जवान
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उनके मुताबिक बचाव एवं राहत कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया था। उन्होंने खुद हवाई सर्वे किया और इसके बाद गाड़ी से रैणी गांव तक पहुंचे। देर शाम तक पानी का बहाव श्रीनगर आते-आते धीमा हो गया था और इससे आगे किसी खतरे की आशंका नहीं जताई जा रही है।