लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद कुछ छूट मिलने पर भी बाहरी प्रदेशों से लोग यहां नहीं पहुंच रहे थे। अब प्रदेश सरकार ने बॉर्डर पर छूट दी तो तस्वीर बदलने लगी है। रविवार को यही बदली हुई तस्वीर हरकी पैड़ी और आसपास के इलाकों में दिखाई दी। बाहरी प्रदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। रविवार को हरकी पैड़ी जाने वाली रोड का नजारा एकदम अलग था। रविवार को दिन के करीब साढ़े बारह बजे हरकी पैड़ी पर लगे लाउडस्पीकर से मुनादी सुनाई दी।
‘करीब ढाई साल की एक बच्ची जो अपना नाम परी बता रही है, अपने परिजनों से बिछुड़ गई है। बच्ची के परिजन जहां कहीं भी हों अपनी बेटी को लेने के लिए गंगा सभा के सहायता केंद्र पर पहुंच जाएं।’ यह मुनादी थी हरकी पैड़ी पर छोटे बच्चे के अपने परिजनों से बिछुड़ जाने की। दिनभर में इस तरह के मामले एक नहीं कई सामने आए। दिल्ली की अंजू, ध्रुव और घनश्याम भी अपने साथियों से बिछड़ गए थे। उनको मिलाने का काम गंगा सभा के सहायता केंद्र ने किया। यह नजारा रविवार को हरकी पैड़ी और आसपास के उन गंगा घाटों का था जहां कुछ दिन पहले तक दूर-दूर तक यात्री तो दूर की बात स्थानीय लोग भी नजर नहीं आते थे।
बड़ी संख्या में लोग हरकी पैड़ी जा रहे थे या फिर लौट रहे थे। पोस्ट आफिस से हरकी पैड़ी तक पहुंचने में हर किसी को पसीना बहाना पड़ा। मंसा देवी मंदिर को जाने वाले पैदल रास्ते पर भी श्रद्धालुओं की लंबी कतार थी। यह क्रम दिनभर चलता रहा। हरकी पैड़ी पुलिस चौकी के आसपास पांव रखने की जगह नहीं थी। गंगा के घाट पहले की तरह गुलजार थे। ब्रह्मकुंड ही नहीं, नाईसोता, अस्थि प्रवाह, मालवीय, सुभाष घाट पर दूर दूर तक हजारों श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगा रहे थे।
शहर के तीन बड़े पार्किंग स्थल दीन दयाल उपाध्याय, रोड़ीबेलवाला और पंतद्वीप भी रविवार को चौपहिया वाहनों से भरे हुए थे। इन पार्किंग स्थल में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के नंबर के वाहन ही सबसे ज्यादा नजर आए। वीकेंड पर हरिद्वार और ऋषिकेश के लिए बड़ी संख्या में दिल्ली और एनसीआर से लोग यहां पहुंचे। बड़ी संख्या में बाहरी प्रदेशों से यात्रियों के आने से हाईवे पर यातायात का दबाव बढ़ गया। ट्रैफिक का दबाव और हाईवे पर निर्माण कार्य के चलते दिनभर जाम की स्थिति बनती रही। हाईवे पर सुबह से शाम तक वाहन रेंग रेंगकर निकले।
कुछ दिन से बड़ी संख्या में बाहरी प्रदेशों के श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच रहे हैं। यात्रियों की बढ़ती संख्या के बाद गंगा सभा को अपना सहायता केंद्र शुरू करना पड़ा। भीड़ बढ़ने पर लोग अपनों से बिछड़ जाते हैं। इसलिए अब पहले की तरह लोगों को अपनों तक मिलाने के लिए सहायता केंद्र काम कर रहा है। कुछ यात्रियों का कीमती सामान भी छूट गया था तो मुनादी लगाकर उन तक पहुंचाया गया।
- तमन्य वशिष्ट, महामंत्री श्रीगंगा सभा