23 जुलाई से 19 नवंबर 2018 तक चातुर्मास चलेगा। हिंदू धर्म में इसका खास महत्व है। इस दौरान कुछ काम करने से संम्पन्नता और लाभ की प्राप्ति होती है। चार महीने के बाद 19 नवंबर को कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवोत्थानी एकादशी मनाई जाएगी। इसके बाद मांगलिक कार्यों का शुभारंभ हो जाएगा। चातुर्मास में मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान अनवरत होते रहेंगे।
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आ गया पुण्य कमाने का समय, करेंगे ये काम तो मिलेगी संम्पन्नता और लाभ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 06 Jul 2018 09:38 AM IST
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- फोटो : google
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आचार्य विपिन जोशी ने बताया कि चातुर्मास में साधु-संत एक ही स्थान पर बैठकर जप-तप, सत्संग, कथा, प्रवचन आदि करते हैं। इन चार महीनों में शारीरिक और मानसिक स्थिति तो सही होती ही है, साथ ही वातावरण भी अच्छा रहता है। इन चार महीनों के दौरान जमीन पर सोना और सूर्योदय से पहला उठना शुभ माना जाता है। व्रत, जप-तप, साधना और भक्ति के लिए चातुर्मास शुभ माना जाता है। जबकि विवाह संस्कार, ग्रह प्रवेश जातकर्म संस्कार आदि शुभ कार्य करना अशुभ माना जाता है।
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बताया कि वेद-पुराणों के अनुसार मनुष्य को इन चार महीनों में दान करना चाहिए। पूजा पाठ करनी चाहिए। ऐसा करने से दुखों से मुक्ति मिलती है और घर में शांति रहती है। इन चार महीनों में भगवान को दूध, दही, घी, शहद, और मिश्री से स्नान कराने वाले मनुष्य संसार में वैभवशाली होकर स्वर्ग में जाकर इंद्र जैसा सुख भोगते हैं। वहीं धूप, दीप, नैवेद्य और पुष्प आदि से पूजन करने वाला प्राणी अक्षय सुख भोगता है।
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तुलसीदल अथवा तुलसी मंजरियों से भगवान का पूजन करने, स्वर्ण की तुलसी दान करने पर परमगति मिलती है। पीपल का पेड़ लगाने, उस पर प्रतिदिन जल चढ़ाने, उसकी परिक्रमा करने, उत्तम ध्वनि वाला घंटा मंदिर में चढ़ाने, विद्वानों का सम्मान करने, किसी भी प्रकार का दान देने, कपिला गो का दान, शहद से भरा चांदी का बर्तन और तांबे के पात्र में गुड़ भरकर दान करने, नमक, सत्तू, हल्दी, लाल वस्त्र, तिल, जूते और छाता आदि का दान करने वाले मनुष्य को कभी भी किसी वस्तु की कमी नहीं आती है।
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जो व्रत की समाप्ति यानी उद्यापन करने पर अन्न, वस्त्र और शैय्या का दान करते हैं, वह अक्षय सुख को प्राप्त करते हैं तथा सदा धनवान रहते हैं। वर्षा ऋतु में गोपीचंदन का दान करने वालों को सभी प्रकार के भोग एवं मोक्ष मिलते हैं। जो नियम से भगवान गणेश और सूर्य भगवान का पूजन करते हैं, वह उत्तम गति को प्राप्त करते हैं। माता लक्ष्मी और पार्वती की पूजा करने के लिए चांदी के पात्र में हल्दी भर कर दान करनी चाहिए। चातुर्मास में फलों का दान करने से नंदन वन का सुख मिलता है। जो लोग नियम से एक समय भोजन करते हैं, भूखों को भोजन खिलाते हैं, स्वयं भी नियमबद्ध होकर चावल अथवा जौं का भोजन करते हैं, भूमि पर शयन करते हैं, उन्हें अक्षय कीर्ति प्राप्त होती है। इन दिनों में आंवले से युक्त जल से स्नान करना तथा मौन रहकर भोजन करना श्रेयस्कर है।