नवरात्र पर तंत्र साधना के लिए हरिद्वार के निर्जन क्षेत्रों में देश के विभिन्न भागों से अनेक तंत्र साधक यहां पहुंचे हैं। इन वनों नवरात्र पूजा पहले से चल रही है।
गुप्त नवरात्र पर तंत्र साधना है बेहद फलदायी, जानिए किस तरह होती है यह साधना
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छठे नवरात्र को कात्यायनी और सप्तम को कालरात्रि की विशेष पूजा शुक्रवार को सुबह शुरु हो गई। कालरात्रि की साधना दोनों दिन पूरी रात चलेगी।
पंचपुरी के सभी प्रमुख मंदिरों में 10 दिन सभी देवियों की पूजा-अर्चना की जाती है, किंतु कात्यायनी और कालरात्रि की विशेष आराधना होती है।
दो वर्ष पूर्व तक हरिद्वार के दक्षिण काली मंदिर में सप्तम कालरात्रि को पशु बलि भी दी जाती थी। जनसमुदाय और धार्मिक जनों के निरंतर विरोध के चलते गतवर्ष पीठाधीश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने बलि प्रथा बंद कर दी।
इस वर्ष भी प्रथा का अनुकरण नहीं किया जाएगा। प्रतीकात्मक रूप से पेठे, तरबूज और कद्दू की बलि प्रदान की जाती है। बलि प्रथा समूचे उत्तराखंड में बंद हो चुकी है।