शहरी विकास मंत्रालय की ओर से स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर जारी रिपोर्ट में देहरादून को बेशक सफाई के मामले में पूरे राज्य में नंबर वन और पूरे देश में 82वें स्थान पर रखा हो, लेकिन हकीकत कुछ और है।
आलम ये है राजधानी के तमाम इलाकों में अभी सफाई का स्तर वह नहीं है, जिससे यह साबित होता हो कि यह बहुत अधिक साफ सुथरे शहरों में से एक है। स्वच्छ सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी होने के अगले दिन अमर उजाला की टीम ने राजधानी के विभिन्न इलाकों का जायजा लिया।
कनक चौक, तिब्बती मार्केट, धामावाला, मच्छी बाजार, अंसारी मार्ग समेत कई इलाकों में मुख्य मार्गों पर कूड़ा करकट के साथ ही गंदगी का अंबार देखने को मिला। जिसने नगर निगम की ओर से शहर को साफ सुथरा बनाए जाने को लेकर चलाए जा रहे अभियान की कलई खुल रही है। जहां एक तरफ स्वच्छ सर्वेक्षण रिपोर्ट में पूरे राज्य में नंबर वन घोषित किए जाने के बाद देहरादून नगर निगम के अधिकारी, कर्मचारी से उत्साहित हैं।
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देहरादून में लगे कूड़े के ढेर
- फोटो : अमर उजाला
वहीं कई जागरूक लोगों का कहना है कि राजधानी को इंदौर की तर्ज पर साफ सुथरा बनाए जाने को लेकर अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।
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देहरादून में लगे कूड़े के ढेर
- फोटो : अमर उजाला
जिसके लिए नगर निगम प्रशासन के अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ ही आमजन को जागरूक होना होगा। वहीं सर्वेक्षण राज्य के अधिकतर कैंट क्षेत्रों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।
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देहरादून में लगे कूड़े के ढेर
- फोटो : अमर उजाला
नौ कैंट क्षेत्रों में तीन ने ही पहले साल की तुलना में अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। इनमें दून और चकराता कैंट शामिल है, जबकि अल्मोडा कैंट का प्रदर्शन यथावत रहा है।
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देहरादून में लगे कूड़े के ढेर
- फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड में नौ कैंट बोर्ड हैं। इसमें लैंसडौन, रानीखेत, नैनीताल, लंढौर कैंट, क्लेमेनटाउन कैंट, देहरादून कैंट, चकराता कैंट, अल्मोड़ा कैंट व रुड़की कैंट शामिल हैं।