16 दिसंबर 2012 की सर्द रात को हुए उस जघन्य कांड को सहने वाली निर्भया का दर्द आज भी कोई नहीं भूला है। छह साल पहले आज ही दरिंदों ने निर्भया की आबरू को तार-तार कर उसे मौत के दरवाजे तक पहुंचा दिया था। जब निर्भया जिंदगी से हार गई तो उसने अपने आखिरी पलों में मां से जो बातें की वो आपको भी अंदर तक हिला देंगी।
निर्भया देहरादून के इंस्टीट्यूट से पढ़ाई कर रही थी। उसकी सहेलियां आज भी उसे याद कर रोती हैं। निर्भया की कहानी हर इंसान को अंदर तक झकझोरने वाली है। यहां तक कि उसका इलाज करने वाले डॉक्टर भी अंदर तक हिल गए। उस दिन निर्भया के साथ जो हुआ वह कभी किसी के साथ न हो अब इसकी बस दुआ की जा सकती है।
उस हादसे के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में निर्भया जिंदगी की जंग लड़ रही थी। वह इस हालत में नहीं थी कि किसी से कुछ भी कह सके। ऐसे में वह अपनी बात अपनी मां से कागज पर लिखकर बताती थी।
वह कहती थी कि मां मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मैने आपसे और पापा से फिजियोथेरेपिस्ट बनकर लोगों के दुख को दूर करने का वादा किया था। लेकिन आज मुझसे अपना ही दुख बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
कहा कि मां मैं सांस भी नहीं ले पा रही हूं। जब भी मैं आंखें बंद करती हूं तो लगता है कि मैं बहुत सारे दरिंदों के बीच फंसी हूं। वो दरिंदे मेरे शरीर को नोच रहे हैं।