उत्तराखंड में करीब साढ़े चार साल की मासूम के साथ स्कूल के वैन चालक-परिचालक यह घिनौनी हरकत पखवाड़े भर से कर रहे थे। बच्चों को छोड़ते हुए जब वैन अंतिम छोर पर मासूम के घर तक पहुंचती उस वक्त वह वैन में अकेली होती थी।
इसी का फायदा उठाकर चालक-परिचालक बच्ची के नाजुक अंगों से छेड़छाड़ करते थे। 17 सितंबर को बच्ची दर्द से छटपटाने लगी तो मां उसको डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर बच्ची का परीक्षण करते ही मामला समझ गई। पूछताछ में बच्ची अपनी समझ से जो बता सकी, उससे भी साफ हुआ कि उसके नाजुक अंगों के साथ छेड़छाड़ की जाती थी।
डॉक्टर ने इस बात की पुष्टि भी की है। डॉक्टर के जरिये यह बात एक सामाजिक कार्यकर्ता को पता चली तो उसने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने बच्ची से पूछताछ और वैन की शिनाख्त कराने के बाद उसके चालक-परिचालक को हिरासत में ले लिया। इस बीच किसी तरह यह बात मीडिया को पता चली तो काठगोदाम थाने में मजमा लगने लगा।
पुलिस ने बच्ची के माता-पिता को थाने बुलाकर उनसे तहरीर देने को कहा लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। पुलिस और अन्य लोग कयास लगा रहे थे कि मासूम के माता- पिता पर खामोश रहने के लिए भारी दबाव डाला गया है।
घंटों की मशक्कत के बाद पिता ने केवल बच्ची को पीटे जाने की तहरीर पुलिस को दी। शाम के समय सामाजिक कार्यकर्ता कैप्टन अनिल गुप्ता ने पुलिस को तहरीर दी। इस पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। घटना की जानकारी लेने के लिए रात में एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव और सीओ दिनेश चंद्र ढौडियाल भी थाने पहुंचे।