जम्मू में राजौरी कोटरंका सब डिवीजन केसरी हिल क्षेत्र में शहीद हुए उत्तराखंड के रुचिन और हिमाचल के प्रमोद नेगी के पार्थिव शरीर सेना के विशेष विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। यहां सेना के जवानों ने शहीदों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी और क्षेत्रीय विधायक बृजभूषण गैरोला ने शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित किया।
शनिवार सुबह 11.30 बजे एयरपोर्ट पर शहीदों को रायवाला से आए सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान पूरा एयरपोर्ट परिसर भारत माता के जयघोष से गूंजता रहा। पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की रक्षा के लिए जवान शहीद हुए हैं। दुख की इस घड़ी में सरकार उनके परिजनों के साथ खड़ी है।
श्रद्धांजलि देने के बाद शहीद नायक रुचिन सिंह रावत निवासी गैरसैण ब्लॉक कुनीगाड़ मल्ली गांव, चमोली के पार्थिव शरीर को एंबुलेंस से उनके गांव कुनीगाड़ के लिए भेज दिया गया, जबकि शहीद जवान प्रमोद नेगी निवासी शिलाई गांव, जिला सिरमौर हिमाचल प्रदेश के पार्थिव शरीर को सेना के ट्रक से उनके गांव भेजा गया।
इनकी अगुवाई में दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
कमांडिंग ऑफिसर अमित महाजन, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल जीएस चंद, लेफ्टिनेंट कर्नल आफताफ मंसूर, एसएसपी दलीप सिंह कुंवर, एसपी देहात कमलेश उपाध्याय।
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शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा
- फोटो : अमर उजाला
शहीद के परिजन को मिलेगी सरकारी नौकरी
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि शहीद के परिजनों में से एक को शैक्षिक योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाएगी। वहीं, शहीद के नाम पर स्कूल या सड़क का नाम भी रखा जाएगा। कहा कि उनकी सरकार अब तक 23 शहीदों के परिजनों को सरकारी नौकरी दे चुकी है।
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शहीदों के शव पहुंचे
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रुचिन रावत (30) 2009-10 में सेना में भर्ती हुए थे। रुचिन के चाचा सुरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि शहीद की पत्नी और बेटा जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में ही रहते हैं। उनकी पत्नी ने ही गैरसैंण में अपने माता-पिता को पति के शहीद होने की सूचना दी।
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शहीदों का पार्थिव शरीर पहुंचा जौलीग्रांट एयरपोर्ट
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रुचिन अपने पीछे दादा-दादी, माता-पिता, पत्नी और एक चार साल के बेटे को रोता बिलखता छोड़ गए हैं।
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सीएम धामी ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि
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रुचिन की पत्नी और बेटा उनके साथ जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में ही रहते हैं। रावत ने बताया कि रुचिन काफी हंसमुख स्वभाव का था। वे जब छुट्टी में गांव आते थे तो सामाजिक कार्यों में खूब बढ़-चढ़कर भाग लेते थे।
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