कर्णप्रयाग में 10 दिन पहले हुए विवाद के बाद रुद्रप्रयाग से लेकर देहरादून तक खुफिया तंत्र सिर्फ खाक छानता रहा। फिर चाहे वह नागरसू गुरुद्वारा विवाद हो या फिर विकासनगर में बवाल सब कुछ पुलिस प्रशासन के हाथ से निकलता दिखा।
इस पर जिले और रेंज से लेकर पुलिस मुख्यालय तक स्थिति कई बार नियंत्रण से बाहर हुई और बृहस्पतिवार रात को इसने एक बड़े बवाल की शक्ल ले ली। खुफिया तंत्र की इस नाकामी के बाद पुलिस तंत्र भी हाथ मलता रह गया और ये लोग देहरादून तक पहुंच गए। हालांकि, देहरादून पुलिस का दावा है कि इन लोगों को पटेलनगर क्षेत्र से वापस भेज दिया गया है।
बैरियर तोड़ उत्तराखंड की सीमा में घुसे निहंग: तलवारें लहराईं, कहां गए किसी को पता नहीं; सड़कों पर उतरी फोर्स
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निहंग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दरअसल, गत 16 जून को जब चमोली के कर्णप्रयाग में निहंग और स्थानीय लोगों में विवाद हुआ तो पुलिस ने हमला करने वाले निहंगों के खिलाफ जान से मारने का प्रयास करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर ली। इसके बाद देशभर में इस घटना के संबंध में कई तरह की विवादित पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी।
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दून कूच कर रहे निहंग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला के एक युवक ने थानों को बम से उड़ाने की धमकी तक दे डाली। यहां तक खुफिया तंत्र का ध्यान नहीं गया और मामला रुद्रप्रयाग के नगरासू में कुछ निहंग गुरुद्वारे में घुस गए। इस मामले में पुलिस के आला अफसर कई दिनों तक शांत रहे लेकिन जब स्थिति काबू से बाहर हुई तो पुलिस मुख्यालय बयान जारी करने को राजी हुआ।
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निहंगों को रोकने के लिए तैनात जवान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ पुलिस मुख्यालय ने नगरासू के मामले को निहंग और गुरुद्वारे का आपसी विवाद बताकर पल्ला झाड़ लिया। इसी दौरान पंजाब से आए लोगों और विभिन्न संगठनों के लोगों ने पुलिस के मुखिया और सरकार तक से बात की। सिखों के विभिन्न संगठनों ने लोगों से शांति बरतने की अपील की तो शायद निहंगों ने इनकी बात नहीं मानी लेनिक खुफिया तंत्र इस अपील से खासा प्रभावित हुआ।
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निहंगों ने लहराई तलवारें
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नतीजा यह हुआ कि हिमाचल के पांवटा साहिब से लेकर दून तक बृहस्पतिवार देर रात तक पैदा हुई स्थिति ने आम लोगों से लेकर पुलिस और प्रशासन की नींद भी हराम कर दी। हालांकि, देर रात दावा यह हुआ कि निहंगों को वापस लौटा दिया गया है।