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एक ही कोठरी में छह माह तक पिता के साथ कैद रहे थे एनडी तिवारी

Fri, 19 Oct 2018 09:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Updated Fri, 19 Oct 2018 09:09 AM IST
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ND Tiwari was imprisoned for six months with father in the same cell
nd tiwari

एनडी तिवारी के पिता पूर्णानंद तिवारी वन विभाग की सेवा से इस्तीफा दे बहुत पहले ही स्वाधीनता आंदोलन में शामिल हो गए थे। 1942 में स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने पर तिवारी को भी 17 वर्ष की उम्र में उनके पिता के साथ गिरफ्तार कर धारी डाक बंगले लाया गया। जहां एसडीएम मुसद्दीलाल, जो बाद में यूपी के मुख्य सचिव बने, उन्होंने आंदोलन की राह छोड़ देने को बहुत समझाया लेकिन तिवारी नहीं माने। इसके बाद उन्हें नैनीताल जेल भेज दिया गया जहां पिता-पुत्र एक ही कोठरी में छह माह तक कैद रहे।


 

ND Tiwari was imprisoned for six months with father in the same cell
nd tiwari

छह माह बाद उनके पिता को बरेली सेंट्रल जेल भेज दिया गया। तिवारी को 15 माह की जेल और छह बेंत की सजा हुई और सातवें माह उन्हें भी बरेली जेल भेज दिया गया। यहां उन्हें नाबालिग होने के नाते शुरू में बच्चा बैरक में रखा गया, लेकिन इस दौरान गंभीर यातनाएं दी गईं। जेल में डिप्टी सुपरिटेंडेंट अबुल गफ्फार की पिटाई से उनके हाथ की हड्डी टूट गई और वे एक कान से बहरे हो गए। अफसर आये दिन उनके खाने में मिट्टी मिला देते थे, जिससे वे गंभीर रूप से बीमार रहने लगे। यहां तक कि बीमारी के कारण उनके अधिकांश बाल तक सफेद हो गए थे। इस जेल में आठ माह पिता पुत्र बंद रहने के बावजूद एक दूसरे से मिल नहीं सके थे।

ND Tiwari was imprisoned for six months with father in the same cell
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तिवारी का प्रिय नारा था खुट खुटानी-सूट बिनैक
वर्ष 1950 के आसपास जब यहां खुटानी से तिवारी के गृह क्षेत्र पदमपुरी को जाने के लिए केवल पैदल रास्ता ही था तब एनडी तिवारी ने क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों और अपने साथियों को लेकर श्रमदान कर खुटानी से लेकर विनायक तक लगभग तीन किलोमीटर सड़क बनवाई और नारा दिया खुट खुटानी-सूट बिनैका। यानी कि सड़क बनने के बाद खुटानी से चलना शुरू करोगे तो जल्द विनायक में पहुंच जाओगे। तिवारी के साथ सड़क निर्माण में श्रमदान करने वालों में पूर्व मंत्री स्व. प्रताप भैय्या, पूर्व मंत्री स्व. डूंगर सिंह बिष्ट, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोतीराम पांडे समेत कई लोग शामिल थे। तिवारी का यह नारा खासा चर्चित रहा और आज भी लोग जब भी तिवारी को याद करते हैं तो इस नारे को जरूर दोहराते हैं।
 

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ND Tiwari was imprisoned for six months with father in the same cell
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झूठा आश्वासन देकर तुड़वा दिया था मौन व्रत
पहली पत्नी स्वर्गीय सुशीला तिवारी के नाम पर बने अस्पताल की बदहाली देखकर व्यथित पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी अस्पताल के बाहर ही मौन व्रत पर बैठ गए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व चिकित्सा-शिक्षा मंत्री हरक सिंह रावत ने पूर्व सीएम की सभी बातें मानकर मौन व्रत तुड़वा दिया था। लेकिन, सरकार ने उनकी मांग पर एक कदम भी नहीं बढ़ाया। वर्ष 2015 में एनडी तिवारी अपना जन्मदिन मनाने आए थे। 90 वर्ष की आयु में जन्मदिन के बाद उन्होंने ताबड़तोड़ क्षेत्र भ्रमण किया था। इस दौरान तिवारी एसटीएच की बदहाली को लेकर बहुत भी दुखी थे। एसटीएच में उपकरण, फैकल्टी, डॉक्टरों की कमी समेत अन्य मांगों को लेकर अक्टूबर 2015 के अंतिम सप्ताह में एसटीएच के बाहर मौन व्रत पर बैठ गए थे।
 

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हरीश रावत की सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहीं डॉ. इंदिरा हृदयेश और हरीश दुर्गापाल तिवारी को मनाने पहुंचे थे, मगर बात नहीं बनी। पूर्व चिकित्सा-शिक्षा मंत्री हरक सिंह रावत ने सभी मांगें मानने का आश्वासन दिया था मगर तिवारी नहीं माने थे। रामपुर रोड स्थित एक होटल में रात लगभग 12 बजे तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने फोन पर तिवारी से बात की थी। कहा था कि मौन व्रत पर बैठने की क्या जरूरत थी आप एक बार कह देते हम आपकी बात मान लेते। इसके बाद तिवारी ने मौन व्रत समाप्त कर दिया और फिर सियासत ने अपना रंग दिखाया और आश्वासन तक ही मामला सिमटकर रह गया। 

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