लंबी जद्दोजहद के बाद पूर्व सीएम एनडी तिवारी ने रोहित शेखर को अपना बेटा माना और उनकी मां उज्ज्वला से सबके समक्ष 88 साल की उम्र में विवाह करके इस गुमनाम रिश्ते को पवित्र रिश्ते का नाम दिया। रोहित ने भी बेटे की हर जिम्मेदारी निभाते हुए पिता एनडी तिवारी का पूरा ख्याल रखा। लेकिन, एनडी तिवारी के अपने परिवार वाले उनसे दूर होते चले गए।
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इतना सब होने के बावजूद तिवारी जी को इस बात का मलाल अंतिम समय तक रहा कि वह अपने बेटे को राजनीति में स्थापित नहीं करवा पाए। वहीं, उनसे राजनीति का ककहरा सीखने वाले यशपाल आर्य ने अपने बेटे संजीव आर्य को राजनीति की कक्षा में प्रवेश भी दिलाया और विधायक भी बनवाया।
एनडी तिवारी ने अपने बेटे का राजनीतिक भविष्य संवारने के लिए उसे कांग्रेस में लाने की कई बार कोशिश की, लेकिन कहते हैं कि खुद को तिवारी का शिष्य बताने वाले हरीश रावत ने उन्हें पार्टी में आने ही नहीं दिया। बाद में जरूर कांग्रेस ने रोहित को दायित्व सौंपा, लेकिन पहले हुई फजीहत से नाराज रोहित ने पद लेने से इनकार कर दिया।
इस बीच, एनडी तिवारी और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बीच नजदीकियों की खबरें मीडिया में आईं। जल्द ही इसका असर भी दिखा जब सपा सरकार ने रोहित शेखर को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया। लेकिन, बाद में उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया। 2017 में अचानक विधानसभा चुनाव के दौरान अमित शाह के बुके देने की फोटो के साथ एनडी के भाजपा में शामिल होने की खबर ने राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया।
खांटी समाजवादी से कांग्रेसी बने एनडी तिवारी के भाजपा में जाने की बात किसी को हजम नहीं हुई। किसी ने इसे बेटे रोहित शेखर के लिए किया गया उसूलों से समझौता बताया तो किसी ने कुछ और। पहले तो एनडी ने भाजपा और कांग्रेस के बीच किसी तरह का बुनियादी फर्क नहीं होने का बयान देकर मीडिया को एक और मुद्दा दे दिया।