सावन के तीसरे सोमवार यानी आज नाग पंचमी मनाई जाएगी। पूरे 125 वर्ष बाद ऐसा संयोग लग रहा है, जब सोमवार के दिन ही नागपंचमी है। इसलिए इस पर्व का फल दोगुना मिलेगा। संयोग के साथ-साथ इस दिन यायीजयद योग के साथ हस्त नक्षत्र है।
नागपंचमी: 125 साल बाद आज बन रहा दुलर्भ संयोग, इस शुभ मुहूर्त में करें महादेव और नागदेवता की पूजा
हर साल सावन मास की शुक्ल की पंचमी को नाग पंचमी पर्व मनाया जाता है। लेकिन, इस बार पंचमी बहुत ही दुर्लभ संयोग में पड़ रही है। पंडित संदीप भारद्वाज शास्त्री ने बताया कि पंचमी पर रुद्राभिषेक का भी अत्यंत महत्व है। नाग पंचमी का मुहूर्त पांच अगस्त को सुबह 5:49 से 8:28 के बीच है। जबकि तिथि समाप्ति इसी दिन 3:54 तक रहेगी।
इस नागपंचमी पर प्रसिद्ध त्र्यम्बकेश्वर मंदिर, उज्जैन में कराएं कालसर्प दोष शान्ति पूजा। (विज्ञापन)
पुराणों के अनुसार, इस समय पृथ्वी का भार शेषनाग ने अपने सिर पर उठाया है। इसलिए उनकी पूजा अवश्य की जानी चाहिए। यह दिन गरुड़ पंचमी के नाम से भी प्रसिद्ध है। नाग देवता के साथ इस दिन गरुड़ की भी पूजा की जाती है।
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उन्होंने बताया कि नाग पंचमी पर नागों की पूजा करने से दैहिक दैविक और भौतिक पापों मुक्ति मिलती है, जिनकी जन्मपत्री में कालसर्प दोष है, उसका निवारण करने के लिए यह समय अति उत्तम है। यह दोष भाग्य में अवरोधक बन जाता है। इसके निवारण के लिए नागों के साथ भगवान भोलेनाथ का परिवार सहित पूजन किया जाता है।
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दूध से रुद्राभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। गन्ने के रस से अभिषेक करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। घी से अभिषेक करने से रोग दूर होते हैं। दही से अभिषेक करने से पशु स्वस्थ रहते हैं। शास्त्री ने बताया कि कालसर्प दोष शांति से मुक्ति के लिए कालसर्प दोष का निवारण करना चाहिए।
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