मिथक कहें या सच्चाई उत्तरकाशी के संग्राली गांव की रामलीला में जो भी राजा जनक का किरदार निभाता है उसे संतान प्राप्ति होती है। गांव के लोग प्राय: नि:संतान व्यक्ति को राजा जनक का पात्र बनने के लिए प्रेरित करते हैं।
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ramlila
- फोटो : shriramleelauttarkashi.org
यह सिलसिला दशकों से चलता आ रहा है। इस वर्ष भी शादी के बाद तीन साल से बच्चे की किलकारी के लिए तरस रहे शंभू प्रसाद नैथानी बीते साल रामलीला में राजा जनक का पात्र बने और रविवार 18 सितंबर को घर में बेटी का जन्म हुआ।
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वर्ष 1967 में छानियों में छिल्ले जलाकर संवाद लिखने और पेट्रोमैक्स की रोशनी में शुरू हुई संग्राली गांव की रामलीला भले ही समृद्ध न हो पाई हो, लेकिन राजा जनक के पात्र के साथ जुड़ा मिथक आज भी कायम है।
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ramlila in uttarkashi
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गांव के बुजुर्ग रामकृष्ण भट्ट, सूरजमणि नैथानी बताते हैं कि गांव की रामलीला में सीता के पिता राजा जनक का अभिनय करने वाले व्यक्ति को संतान प्राप्त होती है।
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शुरूआती वर्षों में ही यह मिथक पुष्ट होने पर गांव में यह परंपरा चली आ रही है कि शादी के बाद नि:संतान रहने वाले व्यक्ति को ही जनक के पात्र के लिए चयनित किया जाता है।