उत्तराखंड में रविवार शाम से शुरू हुई मानसून की रिमझिम बारिश से जहां मैदानी इलाकों में लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं पहाड़ और जलभराव वाले इलाकों में लोगों को परेशानियों से दो चार भी होना पड़ा। बिजली गिरने से सितारगंज के नगला गांव की ग्राम प्रधान के पति पृथ्वीपाल सिंह (35) की मौत हो गई।
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कुमाऊं में बारिश से परेशानी
- फोटो : अमर उजाला
उधर, नाचनी में रामगंगा पर बनाए गए लकड़ी के अस्थायी पुल का एक हिस्सा बह गया है। पुल बहने से बागेश्वर जिले के भकोना, केंचुवा, कालापैर, खेती समेत कई गांवों का संपर्क कट गया है। इन गांवों के कई पढ़ने के लिए नाचनी आते हैं। अब बच्चों को 6 किमी की अतिरिक्त दूरी तय कर फल्याटी गांव से होते हुए नाचनी आना पड़ेगा। बारिश और आंधी के कारण रविवार रात अल्मोड़ा जिले में गोविंदपुर दौलाघट में दोमंजिले मकान की टिन की छत उड़ गई।
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कुमाऊं में बारिश से परेशानी
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बनबसा बैराज कंट्रोल रूम के रिकॉर्ड के अनुसार रविवार को दिन में 12 बजे बैराज का जलस्तर सर्वाधिक 26 हजार 774 क्यूसेक था। हालांकि शाम तीन बजे यह घटकर फिर 16 हजार 484 क्यूसेक रह गया। शारदा में जल स्तर बढ़ने से एनएचपीसी और लोहियाहेड पावर हाउस में बिजली का उत्पादन भी बढ़ गया है। धारचूला में काली नदी का जलस्तर 887.90 मीटर, जौलजीबी में गोरी नदी का जलस्तर 603.80 मीटर और मदकोट में गोरी नदी का जलस्तर 1211.10 मीटर रिकॉर्ड किया गया।
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कुमाऊं में बारिश से परेशानी
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डंगोली (गरुड़) में बिजली घर पर बिजली गिरने से एक लाख के उपकरण फुंक गए। इससे कारण चार दर्जन से अधिक गांवों में पांच घंटे बिजली गुल रही। वहीं, आंधी के चलते रनमन (अल्मोड़ा) में लाइन में खराबी आने से सोमेश्वर घाटी के 60 गांवों में नौ घंटे और अल्मोड़ा शहर में मालरोड समेत कई मोहल्लों में करीब छह घंटे बिजली बाधित रही।
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कुमाऊं में बारिश से परेशानी
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बारिश आंधी से काफी नुकसान हुआ है। अल्मोड़ा जिले में गोविंदपुर दौलाघट में पेयजल की चार लाइनों को नुकसान हुआ है। अल्मोड़ा-कोसी मार्ग पर स्यालीधार के पास चीड़ का पेड़ गिरने से जाम लग गया। पेड़ के साथ बिजली का तार भी टूटकर नीचे गिर गया।