बूढ़ी मां को पता ही नहीं था कि बेटा शहीद हो गया। वह नए साल पर अपने बेटे के फोन का इंतजार करती रहीं। शुक्रवार को जब बेटे का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो देखकर मां की आंखों से आंसू नहीं रुके।
नागालैंड में शहीद हुए 24 आसाम राइफल के जवान गोपाल सिंह माहरा का पार्थिव शरीर शुक्रवार को उनके पैतृक गांव जजौली लाया गया। रामेश्वर घाट में सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया।
उनकी वृद्ध मां कौशल्या देवी को बेटे के शहीद होने की जानकारी नहीं दी गई थी। जैसे ही उन्हें यह दुखद सूचना मिली वह सुध-बुध खो बैंठीं। इसके बाद वह दहाड़ मारकर रो पड़ीं। शहीद के दो छोटे भाईयों की पत्नियां बीना माहरा, सीमा मेहरा और चाची मधुली देवी बेहोश हो गई।
शहीद गोपाल सिंह की दो बेटियां और एक बेटा है। उनकी छोटी बेटी हिमानी को नये साल पर अपने पिता को विश नहीं कर पाने का मलाल है। हिमानी ने बताया कि 31 दिसंबर को उसकी अपने पापा से बात हुई थी। दादी और उन्होंने नये साल पर पहली जनवरी को फोन कर शुभकामनाएं देने का वादा किया था, लेकिन किसी काम से चले जाने से बात नहीं हो सकी।
उसके अगले ही दिन उसे पता चला कि अब उसके पापा इस दुनिया में नहीं रहे। हिमानी के अनुसार वह अपने पापा को विश नहीं कर पाई, इसका उसे हमेशा मलाल रहेगा। शहीद गोपाल सिंह चार भाइयों में दूसरे नंबर के थे। उनसे बड़े भाई निर्मल सिंह 33 असम राइफल में नगालैंड में तैनात हैं।