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जब इस गांव के लोगों ने चीन के खतरनाक मंसूबों पर फेर दिया पानी, जानिए कैसे?
Sun, 22 Jan 2017 01:03 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 22 Jan 2017 01:03 AM IST
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mana village
- फोटो : GirishRanjalTiwari
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ये देश की सीमा पर बसा आखिरी गांव है। कुछ दूरी पर चीन/तिब्बत की सीमा शुरू हो जाती है। इस गांव की भौगोलिक स्थिति की तरह इसकी कहानी दिलचस्प है।
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- फोटो : GirishRanjalTiwari
उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम से तीन किमी आगे जाने पर स्थित हैं माणा गांव। इस गांव में मंगोलियन मूल के लोगों की आबादी है। इन लोगों की देश प्रेम की कहानी सुन आप भी गर्व से भर उठेंगे।
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- फोटो : GirishRanjalTiwari
यहां के निवासियों ने आजादी के बाद चीन के भारी दबाव और लालच को ठुकराकर इस समूचे क्षेत्र को भारत के साथ जोड़ने में बहुत ही अहम भूमिका निभाई। माणा के निवासियों को आज भी अपने पूर्वजों के इस निर्णय पर फक्र है।
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- फोटो : AmarUjala
समुद्रतल से 10,248 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह गांव था तो भारत का हिस्सा लेकिन देश सुदूर और दुर्गम में होने के चलते इसे भुला दिया गया था। 1962 में भारत-चीन में युद्ध शुरू हो गया।
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युद्ध के दौरान यहां के निवासियों को खुद के भारत के नागरिक होने पर संशय था। उसकी वजह भी थी। यहां की भोटिया जनजाति, जो कि मंगोलों के वंशज हैं, को चीनी माना जाता था। उनके पास भारतीय नागरिकता तक नहीं थी।
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