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निकले थे बकरी खोजने, मिल गई 'पांडवकालीन' गुफा, अद्भुत तस्वीरें

Fri, 25 Nov 2016 04:21 PM IST
मुकेश जुयाल/मनीष त्रिपाठी, अमर उजाला/ विकासनगर
मुकेश जुयाल/मनीष त्रिपाठी, अमर उजाला/ विकासनगर Updated Fri, 25 Nov 2016 04:21 PM IST
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mahabharata times cave found in jaunsar
lakhamandal cave

उत्तराखंड के जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा रहा है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहीं अपना समय व्यतीत किया था।

mahabharata times cave found in jaunsar
longest cave in tiuni - फोटो : AmarUjala

इसी क्रम में तीन दिन पहले गांव निवासी चरवाहे मोहन सिंह की दो बकरियां जंगल में गुम हो गईं थीं। रात होने पर वो वापस लौट आए और अगले दिन चरवाहे रतनसिंह, मदन सिंह को लेकर वो जंगल में पहुंचा। बकरी को खोजते खोजते तीनों घने जंगल में पहुंच गए। वहां गुफा से आती रोशनी देख सभी आश्चर्यचकित रह गए।

 

mahabharata times cave found in jaunsar
longest cave in tiuni - फोटो : AmarUjala

पांडवों की मौजूदगी के साक्ष्य जौनसार में अब भी कई जगह दिखाई पड़ते हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य विजयपाल रावत की मानें तो कुछ साल पहले यहां विदेशी आए थे और गुफा से कुछ आकृतियां छेनी की मदद से निकालकर अपने साथ ले गए थे। गुफा में छेनी का कुछ हिस्सा फंसा हुआ भी मिला है।
 

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mahabharata times cave found in jaunsar
lakhamandal

इतिहास पर नजर डालें तो राजधानी देहरादून से 125 किमी दूर यमुना किनारे मौजूद लाखामंडल में ही पांडवों के अज्ञातवास के दौरान छिपकर रहने के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। यहीं पांडवों ने लाख का महल ‘लाक्षागृह’ बनाया था। यहां से बचकर भागने के लिए पांडवों ने सुरंग बनाई थी। कहा जाता है कि यह सुरंग हस्तिनापुर तक पहुंचती है। यहीं पर कौरवों ने पांडवों को जलाने की कोशिश की थी।

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mahabharata times cave found in jaunsar
lakhamandal

यहां लाखों की संख्या में शिवलिंग मिले हैं। इस स्थान को आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की निगरानी में रखा गया है। लाक्षागृह गुफा के अंदर स्थित शेषनाग के फन के नीचे प्राकृतिक शिवलिंग के ऊपर टपकता पानी यहां की खासियत है।
 

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