देवभूमि उत्तराखंड को अगर वीरों की भूमि कहा जाए तो ये गलत नहीं होगा। यहां के युवाओं की भारतीय सेना में जाने का जज्बा देख खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड को वीर भूमि के नाम से पुकारा था। रुद्रप्रयाग जिले के जखोली विकासखंड का लुठियाग गांव देश सेवा के लिए समर्पित है। प्रथम विश्व युद्ध से लेकर स्वतंत्रता संग्राम और आजादी के बाद गांव के वीरों से अपने शौर्य का लोहा मनवाया है।
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भारत मां को समर्पित है ये गांव, यहां के लोगों की देशभक्ति देख गर्व से चौड़ा होगा आपका सीना
ब्यूरो / अमर उजाला, जखोली
Updated Wed, 16 Aug 2017 08:52 AM IST
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luthiyag
- फोटो : amarujala
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Indian Army
जिले का दूरस्थ लुठियाग गांव अपना विशेष स्थान रखता है। 257 परिवार वाले इस गांव में वर्तमान समय में 40 से अधिक लोग सेना और 20 से अधिक अर्द्धसैनिक बलों व पुलिस में कार्यरत हैं। बीते पांच-छह वर्षों से गांव के कम से कम 5 युवा प्रतिवर्ष सेना की पासआउट परेड का हिस्सा बनते आ रहे हैं।
Indian Army
- फोटो : File Photo
गांव के युवाओं में सेना के प्रति अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। दूसरी तरफ गांव में 40 से अधिक पूर्व सैनिक भी हैं, जो वर्षों की सेवा कर रिटायर हुए हैं। कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने 1662 के भारत-चीन युद्ध में भी हिस्सा लिया है।
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इंडिया गेट
- फोटो : अमर उजाला
80 वर्षीय मनवरी देवी, पूर्व प्रधान कुंवर सिंह कैंतुरा, महावीर सिंह कैंतुरा आदि बताते हैं सेना के प्रति उनके पूर्वजों का लगाव रहा है। प्रथम विश्व युद्ध में गांव के दो सगे भाई मुरारी सिंह व देव सिंह ने अंग्रेजों की तरफ से लड़ाई लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की थी। इन दोनों भाईयों का नाम दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकित है।
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस
- फोटो : pti
इसके अलावा दिल सिंह और उमराव सिंह सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज का हिस्सा रहे हैं। आजादी के बाद वर्ष 1962, 1971, 1975 और 1999 के कारगिल युद्ध में भी यहां वीर सपूतों ने अपना पराक्रम दिखाया है।