कांवड़ यात्रा से ठीक पहले पुलिस के पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के दावे हवाई साबित हुए हैं। अमर उजाला की पहली पड़ताल में सुरक्षा इंतजाम की पोल खुलने के बाद एडीजी कानून व्यवस्था ने एसएसपी से स्पष्टीकरण मांगा था। माना जा रहा था कि कुछ सुधार हुआ होगा। एडीजी के फरमान पर रुड़की पुलिस के सुधार का बुधवार देर रात को एक बार भी जायजा लिया गया। हाईवे, कांवड़ पट्टी और देहात के क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस दूसरे ‘लिटमस टेस्ट’ में भी फेल साबित हुई है।
कांवड़ यात्रा सुरक्षा लाइव: एडीजी के आदेशों पर भी नहीं टूटी मित्र पुलिस की नींद
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रात 11:41 बजे : सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र स्थित पुलिस चौकी में तैनात सिपाही कुर्सी पर सोते मिला। उसे आवाज देने की कोशिश की गई, लेकिन नींद उसपर हावी थी। रात 12:58 बजे : सिविल लाइंस कोतवाली में नाइट अफसर की कुर्सी खाली। कोतवाली में तैनात सिपाही से नाइट अफसर के बारे में पूछा तो बहाना बनाते हुए कार्यालय के अंदर जा घुसा। दिल्ली हरिद्वार हाईवे पर मोहनपुरा के समीप करीब छह माह पहले पुलिस पीकेट का उद्घाटन किया था। टीम ने बुधवार रात 12.22 बजे पर इस पीकेट का निरीक्षण किया तो यहां ताले लटके हुए थे। सिविल लाइंस क्षेत्र में पीरबाबा कालोनी के पास सुनसान जगह पर बनाई गई पुलिस पिकेट पर रात 12.15 बजे मदद लेने के बहाने टीम पहुंची तो वह बंद मिली। पहली पड़ताल में भी पिकेट बंद मिली थी।
रुड़की क्षेत्र के देहात मंगलौर, लक्सर, भगवानपुर, झबरेड़ा व कलियर अपराध के मामले में अतिसंवेदनशील की श्रेणी में आते हैं। बदमाश आए दिन आपराधिक वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस अफसर भी लगातार क्राइम कंट्रोल करने करने को गंभीरता दिखाने के निर्देश दे रहे हैं। लेकिन ग्राउंड पर सुरक्षा इंतजाम का आलम यह है कि पुलिस चौकियों, पुलिस पिकेट व चौराहों से सिपाही ड्यूटी से नदारद मिले। देहात की टीम ने रात 11 से 12:30 बजे तक कांवड़ सुरक्षा की पड़ताल में पुलिस की लापरवाही खुलकर सामने आई। किसी भी चौराहे पर न तो सिपाही तैनात मिले और न ही गश्त करते दिखाई दिए। देहात का यह क्षेत्र यूपी से सटा है। इसके चलते कारण ये सभी क्षेत्र अतिसंवेदनशील माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में अक्सर यूपी के बदमाश दस्तक देकर वारदातों को अंजाम देते हैं।
बुधवार रात 11.15 बजे पर संवाददाता ने कस्बे के बालावाली तिराहे की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कोई पुलिस वाला गश्त करता नहीं दिखा। इसके बाद हरिद्वार पुरकाजी हाईवे पर बनाई पुलिस पिकेट में झांका तो वहां कोई सिपाही नहीं दिखा। कोतवाली में नाइट अधिकारी भी अपनी कुर्सी से गायब था। केवल कस्बे के रुड़की तिराहे पर दो पुलिसकर्मी खड़े दिखाई दिए, जबकि पूरा हाईवे विरान था। ऐसे में डेढ़ सौ से अधिक गांव की सुरक्षा व्यवस्था कैसे हो रही होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने जनपद की सभी कोतवाली व थानों में डे और नाइट अधिकारी की ड्यूटी व्यवस्था के आदेश दिए हैं। बुधवार की रात कोतवाली में नाइट अधिकारी तो कुर्सी से नदारद था। कोतवाली में सन्नाटा पसरा था। अंदर दफ्तर में रात्रि मुंशी के साथ एक अन्य पुलिसकर्मी जरूरी मौजूद था।