भू-धंसाव ने जोशीमठ नगर में भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक बदलाव तो किए ही हैं अब इसका असर सदियों से चली आ रही परंपराओं पर भी पड़ने लग गया है। सिंहधार वार्ड में बारह महीने बहने वाला प्राकृतिक जल स्रोत पूरी तरह सूख गया है। इस मोहल्ले की दुल्हनें धारा पुजाई की परंपरा को इसी जलस्रोत पर संपन्न करती थीं लेकिन अब यह सूख गया है।
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भू-धंसाव से जमीन में आई दरारों के चलते यहां के प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लग गए हैं। सिंहधार वार्ड के प्रेमनगर में प्राकृतिक जल स्रोत है। इसमें सर्दी से लेकर गर्मी तक हर समय पर्याप्त पानी रहता था। पिछले कुछ दिनों से इसमें पानी कम होने लगा है।
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जोशीमठ में सूखा जल स्त्रोत
- फोटो : अमर उजाला
स्थानीय लोगों का कहना है कि बुधवार को यह पूरी तरह सूख गया। 50 वर्षीय रोशन रावत का कहना है कि इतने साल में कभी इस स्रोत से पानी कम नहीं हुआ था। गर्मियों में इस जल धारे का पानी ठंडा रहता था।
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जोशीमठ में घर में दरारें
- फोटो : अमर उजाला
सुधीर हिंदवाल ने बताया कि जब से यहां भू-धंसाव तेज हुआ है इस स्रोत का पानी कम होने लग गया था। अब इसमें पानी आना बंद हो गया है। गर्मियों में जब भी पानी की किल्लत होती थी तो लोग इसी स्रोत से पेयजल आपूर्ति करते थे।
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जोशीमठ में जमीन में दरारें
- फोटो : अमर उजाला
वहीं दीपा देवी, गीता देवी, राखी देवी, सुंद्री देवी का कहना है कि इस मोहल्ले में विवाह कर आने वाली दुल्हनें धारा पुजाई की रस्म को इसी स्रोत पर पूजती थीं। आज तक कभी इसमें पानी कम नहीं हुआ लेकिन अब अचानक यह सूख गया है। इससे आशंका है कि प्राकृतिक स्रोत का पानी भी दरार में समा रहा होगा।
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जोशीमठ में सूखा जल स्त्रोत
- फोटो : अमर उजाला
नगर में प्राकृतिक जल स्रोत के सूखने का यह दूसरा मामला है। दो सप्ताह पहले रोपवे के पास के प्राकृतिक स्रोत का पानी अचानक कम हो गया। इस स्रोत से 90 के दशक में पांच घराट संचालित होते थे। अब इसमें बहुत कम पानी रह गया है। दूसरा मामला अब सिंहधार वार्ड में आया है जहां प्राकृतिक स्रोत सूख गया है।