औली स्थित आईटीबीपी के पर्वतारोहण एवं स्कीइंग संस्थान के जवान इन दिनों गोरसों में स्कीइंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं। आईटीबीपी का यह एकमात्र ऐसा ट्रेनिंग सेंटर है जो वर्षभर में 90 हजार से अधिक जवानों को पर्वतारोहण और स्कीइंग का प्रशिक्षण देता है।
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स्कीइंग का प्रशिक्षण लेते आईटीबीपी के जवान
- फोटो : अमर उजाला
आईटीबीपी की अधिकांश चोकियां भारत-चीन सीमा पर लगभग 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं। यहां पर बर्फीले तूफान के बीच जवानों को पेट्रोलिंग और रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ता है। इन बर्फीले स्थानों पर विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच जवान वर्षभर सीमा की निगेहबानी में डटे रहते हैं।
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आईटीबीपी के जवान
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इन तमाम परिस्थितियों को ध्यान में रखकर जवानों को औली और गोरसों में स्कीइंग और पर्वतारोहण का प्रशिक्षण दिया जाता है। संस्थान के सहायक सैनानी पंकज कुमार शाह ने बताया कि बर्फीले स्थानों में स्थिति आईटीबीपी चौकियों में सेवा देने के लिए जवानों को स्कीइंग, पर्वतारोहण, युद्घ अभ्यास से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है।
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स्कीइंग का प्रशिक्षण लेने पहुंचे लोग
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, जीएमवीएन (गढ़वाल मंडल विकास निगम) की ओर से भी औली में स्कीइंग का प्रशिक्षण शुरू हो गया है। औली में इस बार बर्फ कम है, उसके बावजूद प्रशिक्षण लेने के लिए दिल्ली और मुंबई से लोग औली पहुंचे हैं। औली में हर साल जीएमवीएन सात और 14 दिनों का स्कीइंग कोर्स करवाता है। मंगलवार से स्कीइंग प्रशिक्षण शुरू हो गया है। इसमें मुंबई से छह और दिल्ली से दो लोग प्रशिक्षण के लिए पहुंचे हैं। जीएमवीएन के स्कीइंग प्रशिक्षक किशोर डिमरी का कहना है कि बर्फ कम होने के बावजूद यहां पर बाहर से आए लोग स्कीइंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं। आने वाले समय में यदि अच्छी बर्फबारी हुई तो इस कोर्स को निरंतर जारी रखा जाएगा।
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औली में बनाई जा रही कृत्रिम बर्फ
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि औली में फरवरी में होने जा रहे विंटर गेम्स की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार बर्फबारी कम होने के चलते औली में गढ़वाल मंडल विकास निगम की ओर से कृत्रिम बर्फ बनाने का काम शुरू हो गया है।